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Zee SalaamIndian Muslimदूसरी सबसे बड़ी आबादी, लेकिन हक से महरूम; झारखंड के मुसलमानों ने उठाई आवाज

'दूसरी सबसे बड़ी आबादी, लेकिन हक से महरूम'; झारखंड के मुसलमानों ने उठाई आवाज

Muslim Quota In Jharkhand: कर्नाटक के बाद अब झारखंड में सरकारी नौकरियों में मुस्लिम रिजर्वेशन देने की मांग उठाई गई है. मुस्लिम बुद्धिजीवियों का कहना है कि झारखंड में दूसरी सबसे बड़ी आबादी मुसलमानों की है और यह कम्युनिटी हर क्षेत्र में पिछड़ेपन का सामना कर रही है.

'दूसरी सबसे बड़ी आबादी, लेकिन हक से महरूम'; झारखंड के मुसलमानों ने उठाई आवाज

Muslim Quota In Jharkhand: मुसलमानों के पिछड़ेपन को देखते हुए मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने झारखंड सरकार से मुसलमानों को सरकारी नौकरी में पांच फीसदी रिजर्वेशन देने की मांग की है. मुस्लिम बुद्धिजीवियों का कहना है कि झारखंड में दूसरी सबसे बड़ी आबादी मुसलमानों की है और यह कम्युनिटी हर क्षेत्र में पिछड़ेपन का सामना कर रही है.

झारखंड कुदरती संसाधनों में आगे है. बिहार से अलग होने के बाद यह उम्मीद किया गया था कि झारखंड कई क्षेत्रों में तरक्की हासिल करके जल्द डेवलपमेंट में पहले नंबर पर आ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उम्मीद की जा रही थी कि वह राज्य के विकास के लिए कोई ठोस कदम उठाएगें.

5% रिजर्वेशन की मांग
मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने कहा है कि हेमंत सोरेन के दूसरे बार सीएम बनने में मुस्लिम कम्युनिटी ने बहुत सपोर्ट किया है और अब ये कम्युनिटी अपने हक के लिए सरकार से नौकरियों में महज पांच फीसदी रिजर्वेशन की मांग कर रही है. आपकों बता दें कि कर्नाटक में मुसलमानों को पांच फीसदी रिजर्वेशन मिला हुआ है और ये रजिर्वेशन महाराष्ट्र में भी मुसलमानों के पास था, जिसे सत्ता में आने के बाद बीजेपी ने हटा दिया है. 

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राज्यों में मुसलमानों के हालात 
मुस्लिम बुद्धिजीवियों का कहना है कि अब जब सोरेन दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने जा रहे है तो मुस्लिम समाज उनसे उम्मीद कर रहे हैं कि वह मुसलमानों को सरकारी नौकरी में पांच फीसदी तक रिजर्वेशन देगें. 'द सहारा' से बातचीत करते हुए मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने कहा है कि झारखंड के सात जिलों में मुसलमानों की बडी़ आबादी है. लेकिन, सरकारी नौकरी में हमारी हिस्सेदारी एक फीसदी भी नहीं है. राज्य की दूसरी सबसे बड़ी आबादी के साथ यह व्यवहार बर्दाशत के काबिल नहीं है. आदिवासियों की तरह मुसलमानों ने भी झारखंड को विकासित राज्य बनाने में कई कुर्बानी दी है. 

सरकार के सत्ता में आने के बाद आदिवासियों को हर मुमकिन सुविधाएं मिली है, लेकिन मुस्लिम कम्युनिटी अभी भी इससे महरूम हैं. झारखंड में स्थानीय चुनाव होने वाले है, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि सीएम मुसलमानों के हक में कुछ बेहतर कदम उठाएंगे, ताकि मुसलमानों के लिए भी सराकरी नौकरी में दरवाजा खुल सकें.

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