Waqf Amendment Act 2025 Controversy: वक्फ अमेंडमेंट एक्ट की मंजूरी के बावजूद इस पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. आज जुमे के बाद वक्फ कानून को लेकर देश भर के अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारियों ने सरकार से बिल को वापस लेने की मांग की, ऐसा न करने पर प्रदर्शन को व्यपाक स्तर पर करने का ऐलान किया है.
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Protest on Waqf Amendment Act 2025: वक्फ संशोधन बिल को बीते 5 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दे दी, जिसके बाद यह कानून बन गया. वक्फ बिल एक्ट को लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहा है. आज शुक्रवार (11 अप्रैल) को देश के अलग-अलग हिस्सों से इस बिल के खिलाफ प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही हैं. सियासी दलों के साथ मुस्लिम संगठनों के भारी विरोध के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एक नई मुहिम शुरू की है. इसके तहत 30 अप्रैल को रात 9 बजे बिल के विरोध में अपने घरों और दफ्तरों की बिजली बंद कर विरोध करने की अपील की है.
आर्थिक राजधानी मुंबई में भी जुमे की नमानज के बाद वक्फ बिल को लेकर सड़कों पर भारी विरोध देखने को मिला. इसी तरह असम के उपनगर गुहावटी, बिहार की राजधानी पटना, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जुमे की नमाज के बाद लोगों ने जोरशोर से विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया. प्रदर्शन में मुस्लिम संगठनों के साथ कई सियासी दलों के साथ अन्य धर्मों के धर्मगुरुओं ने भी हिस्सा लिया और अपना विरोध दर्ज कराया. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जुमे की नमाज के बाद काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन करने का ऐलान किया था. AIMPLB की अपील का असर भी दिखा. लोग जुमे की नमाज में हाथों पर काली पट्टी बांधकर पहुंचे. इसके उलट यूपी पुलिस ने काली पट्टी पहनने पर रोक लगा दी थी. पुलिस ने अंदेशा जताया था कि इससे प्रदेश में कानून व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है. भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच लखनऊ में भी जुमे की नमाज के बाद भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला.
यूपी की राजधानी लखनऊ में योगी सरकार ने वक्फ अमेंडमेंट एक्ट के खिलाफ विरोध की आशंका के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था के सख्त इंतजाम किए थे. जुमे की नमाज के बाद इमामबाड़े के आसिफी मस्जिद के बाहर लोगों बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों आरोप लगाया कि सरकार के जरिये जबरन लागू किया जा रहा है ये कानून सही नहीं है. प्रशासन ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कड़े इंतजाम किए थे. लखनऊ में सपा नेताओं के घरों पर जुमे की नमाज के बाद बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रही.
प्रदर्शन में शामिल मौलाना कल्बे जव्वाद का कहना है कि कई ऐसी इमारतें हैं जो वक्फ से हटा दी गई, पुरातत्व विभाग में जो धार्मिक इमारतें हैं उनको वक्फ से हटा दिया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार बहुत बड़ा जुल्म कर रही है. बड़ा इमामबाड़ा से 18 करोड़ रुपये सालाना आमदनी होती है और किसी गरीब को कुछ नहीं मिलता है. कल्बे जव्वाद ने कहा कि यह बिल उद्योगपतियों के लिए लाया गया है, उन्हीं का फायदा इस बिल से है. अगर यह बिल वापस नहीं लिया गया तो हम लोग सड़कों पर भी उतरेंगे.
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में जुमे की नमाज के बाद लोग सड़कों पर नजर आए. मुंबई की भायखला में भी वक्फ एक्ट के खिलाम मुस्लिम समाज ने अनूठा प्रदर्शन किया. भायखला की चिश्ती हिंदुस्तानी मजीद में नमाजियों ने साइलेंट विरोध प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन में पूर्व विधायक और एआईएमआईएम नेता वारिस पठान भी अपने समर्थकों के साथ शामिल हुए. बाद में पुलिस ने वारिस पठान को हिरासत में ले लिया. कई नमाजियों ने AIMPLB की अपील के मुताबिक, अपने हाथों पर काले फीते बांधकर नमाज पढ़ने के लिए पहुंचे थे.
राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी बिल की मंजूरी मिलने के बाद प्रदर्शन देखने मिल रहा है. आज जुमे की नमाज के बाद यहां पर की जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस कानून को वापस लेने की मांग की. जुमे की नमाज की पारंपरिक परिधानों के साथ लोगों ने अपने बाजुओं पर काली पट्टी बांधकर प्रतीकात्मक विरोध जताया.
वक्फ अमेंडमेंट एक्ट के खिलाफ आज पूरे मुल्क के साथ-साथ गुवाहाटी के सिजुबरी हाउसफेड में भी जुम्मे के नमाज के बाद बड़ी तादाद में लोग इकट्ठा होकर प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के बाद मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल को मौके पर तैनात कर दिया गया. पुलिस ने भीड़ को इकट्ठा नहीं होने दिया. प्रदर्शन में शामिल लोगों ने बताया कि इस कानून को सरकार को वापस ले लेना चाहिए. गुवाहाटी के साथ असम के अलग-अलग हिस्सों में आज जुमे की नमाज के बाद जोरदार प्रदर्शन देखने को मिल रहा है.
वक्फ अमेंडमेंट एक्ट लागू होने के बाद पश्चिम बंगाल विरोध का केंद्र बनता जा रहा है. दो दिन पहले वक्फ एक्ट के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान मुर्शिदाबाद में हिंसा फैल गई थी. इस दौरान लोगों ने एनएच हाइवे को जाम कर दिया था. आज भी जुमे को राजधानी कोलकाता में आलिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने विवादित कानून को लेकर प्रदर्शन किया. छात्रों ने हाथों में पोस्टर बैनर के साथ यूनिवर्सिटी के पार्क सर्कस तक मार्च किया और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है.
केंद्रीय राजधानी दिल्ली में वक्फ अमेंडमेंट एक्ट के खिलाफ सड़कों पर तो कोई प्रदर्शन देखने को नहीं मिल रहा है, लेकिन दूसरी तरह से लोग अपना विरोध जता रहे हैं. सीएए कानून के दौरान चर्चा में रहा शाहीन बाग में जुमे की नमाज के बाद हालात सामान्य रहे. शाहीन बाग समेत दिल्ली के दूसरे हिस्सों में मुस्लिम समाज के साथ अन्य लोगों में वक्फ बिल के खिलाफ नाराजगी देखी जा सकती है. मशहूर जामा मस्जिद में नमाज के लिए पहुंचे नमाजियों ने इस वक्फ कानून को मुस्लिम विरोधी और गलत बताया. नमाजियों ने केंद्र सरकार से इस बिल को वापस लेने की मांग की है.
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद भी आज वक्फ अमेंडमेंट एक्ट 2025 के खिलाफ विरोध से अछूती नहीं रही है. जुमे की नमाज के बाद सैदाबाद में वह वहदत-ए-इस्लामी की अगुवाई में मस्जिद-ए-उजाले शाह में प्रदर्शन किया गया. इस प्रदर्शन का आयोजन जॉइंट एक्शन कमेटी ने मस्जिद के बाहर किया.
इसी तरह हैदराबाद के शाहीननगर में उस्मानिया होटल के पास बड़ी रैली आयोजित की गई. इसके अलावा मौला अली में दोपहर को जुमे की नमाज के बाद "वक्फ बचाओ मार्च" निकाली गई. साथ में सेरिलिंगमपल्ली में मोती मस्जिद से तारानगर मस्जिद तक आज मार्च होगा. वक्फ कानून के खिलाफ हो रहे भारी प्रदर्शनों को देखते हुए हैदराबाद पुलिस अलर्ट पर है.
वक्फ संशोधन कानून को लेकर बिहार में भी सियासी पारा हाई है. आज पटना में मुस्लिम समुदाय के साथ अन्य सियासी जमातों ने सरकार को चेतावनी दी कि अगर यह कानून वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वक्फ बिल में संशोधन का मकसद बोर्ड की शक्तियों को कम करना, ऐसा होने से धार्मिक संपत्तियों में सरकार के दखल का रास्त खुल सकता है.
श्रीनगर में भी जुमे की नमाज के बाद पीडीपी नेताओं ने वक्फ अमेंडमेंट एक्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. पीडीपी नेता मोहम्मद इकबाल ट्रंबू ने कहा कि यह कानून मुसलमानों के खिलाफ है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को सड़क पर लाकर केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट को एक संदेश देना चाहती है. पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने जम्म कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के इस मुद्दे पर चुप्पी पर कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि बीजेपी मुसलमानों पर हर तरफ से हमले कर रही है.
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