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Muzaffarnagar Student Case: यूपी के मुजफ्फरनगर थप्परकांड से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरनगर जिले के एक स्कूल में एक मुस्लिम स्टूडेंट और उसके साथी की काउंसलिंग के लिए एक कमेटी नियुक्त करने का आदेश दिया था. इसके पालन न होने पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है.
दरअसल, एक स्टूडेंट्स के होमवर्क पूरा न होने पर स्कूल की महिला टीचर ने स्टूडेंट्स को थप्पड़ मारने का निर्देश दिया था. स्कूल महिला टीचर पर पीड़ित लड़के को लेकर सांप्रदायिक टिप्पीणी करने का भी इल्जाम लगा था.
इस मामले पर जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस पंकज मिथिल की बेंच ने राज्य के एजुकेशन डिपार्टमेंट के चीफ सचिव को किसी भी कड़ी कार्रवाई से बचने के लिए अगली सुनवाई के दौरान वर्चुआल तरीके से हाजिर रहने का निर्देश दिया है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने घटना में शामिल बच्चे और उसके साथियों की काउंसलिंग के मोड और तरीके का सुझाव देने के लिए मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज को नियुक्त किया था.
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, सुनवाई कर रही बेंच ने कहा, "पक्षों के वकील को सुनने के बाद हमारा मानना है कि यूपी सरकार और मुख्तलिफ रूप से एजुकेशन विभाग ने वक्त-वक्त पर इस कोर्ट की तरफ से दिए गए विभिन्न आदेशों का पालन नहीं किया है. पीड़ित बच्चे और घटना में शामिल दूसरे बच्चों की उचित काउंसलिंग नहीं की गई. बच्चों को काउंसलिंग देने के संबंध में दायर हलफनामे से पता चलता है कि राज्य सरकार का दृष्टिकोण चौंकाने वाला है."
बेंच ने आदेश दिया है, "इसलिए हमने बच्चे और दूसरे बच्चों को काउंसलिंग देने के मोड और तरीके का सुझाव देने के लिए मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज को नियुक्त किया. TISS राज्य में मौजूद एक्सपर्ट बाल परामर्शदाताओं के नाम भी सुझाएगा. TISS की देखरेख में काउंसलिंग को आगे बढ़ा सकते हैं."
बेंच ने कहा, ''हम एजुकेशन विभाग के मुख्य सचिव को कोर्ट की किसी भी कड़ी कार्रवाई से बचने के लिए व्यक्तिगत रूप से हाजिर रहने का निर्देश देते हैं. हमें उम्मीद है कि वह व्यक्तिगत रूप से इस मामले को देखेंगे और देखेंगे कि निर्देशों का पालन किया जाए."
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