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Nagpur: पाक शायर फैज की नज़्म पर फिर बवाल, अब क्यों हुई FIR दर्ज?

Nagpur News: नागपुर के प्रोग्राम में पाकिस्तानी शायर फैज अहमद फैज की नज़्म पढ़ी गई, जिसकी वजह से भारी विवाद हुआ है. पुलिस ने कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. पढ़ें पूरी खबर

Nagpur: पाक शायर फैज की नज़्म पर फिर बवाल, अब क्यों हुई FIR दर्ज?

Nagpur News: नागपुर में आयोजित एक प्रोग्राम के दौरान मशहूर पाकिस्तानी शायर फैज़ अहमद फैज़ की नज़म ‘हम देखेंगे’ पढ़ी गई, जिसके बाद पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है. इनमें दिवंगत अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता वीरा साठिदार की पत्नी पुष्पा साठिदार भी शामिल हैं. इससे पहले भी इस नज़्म को लेकर विवाद हो चुका है. 2019 में CAA प्रोटेस्ट के दौरान स्टूडेंट्स के जरिए इस नज़्म को पढ़ा गया था. जिसके बाद इसे हिंदू मुखालिफ बता दिया गया था.

क्या है पूरा मामला?

13 मई को नागपुर के विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन हॉल में वीरा साठिदार की याद में एक प्रोग्राम आयोजित किया गया था. इस प्रोग्राम में कविता पाठ और भाषण हुए, जिनमें से कुछ बयानों को "भड़काऊ और देश की एकता के खिलाफ" बताया गया है. एक स्थानीय निवासी दत्तात्रय शिरके की शिकायत पर नागपुर के सिताबुल्दी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की ये धाराएं लगाई गई हैं. जिनमें, धारा 152 देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालना, धारा 196 धर्म के आधार पर अलग-अलग समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना, धारा 353 ऐसी बातें बोलना जिससे सार्वजनिक शांति भंग हो और धारा 3(5) किसी काम को करने की साझा मंशा शामिल है.

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प्रोग्राम के दौरान ऐसा क्या हुआ कि दर्ज हो गई एफआईआर?

प्रोग्राम में एक महिला कलाकार ने फैज़ की कविता की पंक्तियां पढ़ीं. "हम अहल-ए-सफा, मर्दूद-ए-हरम, मस्नद पे बिठाए जाएंगे... सब ताज उछाले जाएंगे, सब तख्त गिराए जाएंगे, हम देखेंगे." शिकायतकर्ता ने इसे राज्य के खिलाफ उकसाने वाला बताया.

इसके अलावा एक पुरुष वक्ता ने कहा,"हम जिस दौर में जी रहे हैं, ये दौर फासिज्म (तानाशाही) का है. हमारे देश में भी सत्ता को हिलाने की परंपरा रही है." शिकायत के अनुसार, ये बयान सरकार को तानाशाही सरकार से जोड़ते हैं और राजनीतिक उथल-पुथल के लिए उकसाते हैं.

पुलिस ने क्या की कार्रवाई?

पुलिस ने इस मामले में अब तक 5 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं. वीडियो फुटेज, मीडिया कवरेज और गवाहों के बयान की जांच चल रही है. वीडियो की सत्यता की जांच के लिए फॉरेंसिक और साइबर विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है. इस प्रोग्राम का आयोजन वीरा साठिदार स्मृति समन्वय समिति और समता कला मंच ने किया था. समता कला मंच के चीफ सुधीर धवले पहले से ही एलगार परिषद केस (2017) में जमानत पर हैं, इसलिए पुलिस मंच की गतिविधियों और बैकग्राउंड की भी जांच कर रही है.

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Sami Siddiqui

समी सिद्दीकी उप्र के शामली जिले के निवासी हैं, और 6 से दिल्ली में पत्रकारिता कर रहे हैं. राजनीति, मिडिल ईस्ट की समस्या, देश में मुस्लिम माइनॉरिटी के मसले उनके प्रिय विषय हैं. इन से जुड़ी सटीक, सत्य ...और पढ़ें

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