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नागपुर हिंसा में पुलिस समुदाय विशेष के खिलाफ कर रही भेदभाव? कांग्रेस ने बताई सुनियोजित साजिश

Congress on Nagpur Violence: नागपुर हिंसा की जांच करने पहुंची कांग्रेस की 'फैक्ट फाइंडिंग कमेटी' को पुलिस ने रोक दिया. कमेटी के सदस्यों ने पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए हिंसा के पीछे सुनियोजित साजिश की आशंका जताई है.

नागपुर हिंसा में पुलिस समुदाय विशेष के खिलाफ कर रही भेदभाव? कांग्रेस ने बताई सुनियोजित साजिश

Nagpur Violence Update: बीते दिनों नागपुर में हुई हिंसा को लेकर पक्ष और विपक्ष के नेता एक दूसरे लगातार जुबानी हमला बोल रहे हैं. इसी कड़ी में महाराष्ट्र कांग्रेस के सीनियर नेता माणिकराव ठाकरे ने राज्य सरकार पर समुदाय विशेष के खिलाफ भेदभाव बरतने का आरोप लगाते हुए नागपुर हिंसा की जांच पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि पुलिस ने कांग्रेस की "फैक्ट फाइंडिंग" कमेटी को प्रभावित इलाकों का दौरा करने की इजाज ही नहीं दी, तो इंसाप कैसे मुमकिन होगा?

कांग्रेस फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के प्रमुख माणिकराव ठाकरे ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम साबित हुई है, उनके मंत्री समुदाय विशेष को निशाना बनाकर समाज में नफरत फैला रहे हैं. माणिकराव ठाकरे ने कहा कि सिर्फ हिंसा और आगजनी में शामिल लोगों के खिलाफ ही नहीं बल्कि उन असामाजिक तत्वों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, जिन्होंने हालात को और बिगाड़ने में भूमिका निभाई.

कांग्रेस नेता माणिकराव ठाकरे ने बताया कि जांच के दौरान उनकी टीम ने हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों से मिलकर स्थिति का जायजा लिया किया और तथ्यों को इकट्ठा किया, लेकिन पुलिस ने कर्फ्यू का बहाना बनाकर उन्हें हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में जाने से रोक दिया. उन्होंने राज्य सरकार और पुलिस तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश करने के आरोप लगाए. कांग्रेस नेता ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि सरकार के मंत्री और बीजेपी से जुड़े संगठन महाराष्ट्र में हालात खराब करने की साजिश रच रहे हैं.

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'संगठित साजिश की आशंका' 

कांग्रेस के सीनियर नेता ने कहा कि नागपुर हमेशा से एक शांतिपूर्ण शहर रहा है, लेकिन इस बार भयावह हिंसा देखने को मिली, जिसके पीछे किसी संगठित साजिश के आसार नजर आ रहे हैं. ठाकरे ने कहा कि औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग पर किसी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन पवित्र आयतों वाली चादर को जलाने के वीडियो और सबूत मौजूद हैं, जिससे जनता की भावनाएं आहत हुईं. उन्होंने सवाल किया कि आखिर ऐसा विरोध प्रदर्शन क्यों होने दिया गया, जो धार्मिक सद्भाव को नुकसान पहुंचा सकता था?

महायुति सरकार पर निशाना साधते हुए माणिकराव ठाकरने कहा, "अगर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस वास्तव में यह मानते हैं कि नागपुर में हुई हिंसा किसी बड़ी साजिश का हिस्सा थी, तो सवाल यह उठता है कि फिर सरकार के मायने क्या हैं?" उन्होंने कहा कि अगर सरकार समाज के सभी लोगों को सुरक्षा देने में नाकाम है तो राज्यपाल को हस्तक्षेप करके सरकार बर्खास्त कर देना चाहिए. 

कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप 

स्थानीय विधायक और फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सदस्य विकास ठाकरे ने पुलिस से मांग की कि प्रभावित इलाकों में कारोबार दोबारा शुरू करने की इजाजत दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सभी धर्मों की शांति समिति गठित की जाए जिससे सांप्रदायिक सौहार्द्र बना रहे.

अकोला विधायक साजिद पठान ने मुख्यमंत्री के इस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि समिति का एक सदस्य अकोला हिंसा मामले में शामिल है. उन्होंने कहा कि बीजेपी झूठा आरोप लगाकर सच्चाई से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि वे यहां सिर्फ शांति का संदेश लेकर आए थे, लेकिन सरकार बेबुनियाद आरोप लगाकर असली मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है.

क्या है मामला?

बता दें, नागपुर में 17 मार्च को उस समय तनाव पैदा हो गया था, जब विश्व हिंदू परिषद के विरोध प्रदर्शन के दौरान यह अफवाह फैली कि औरंगजेब की मजार को हटाने की मांग के साथ कुरान की आयतें लिखी हुई चादर को आग के हवाले कर दिया गया है. इस घटना के बाद बवाल खड़ा हो गया. इस दौरान तीन डिप्टी कमिश्नर समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए. डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की मदद से अब तक 104 लोगों की पहचान हो चुकी है, जिनमें से 92 के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा चुकी है, जिनमें 12 नाबालिग भी शामिल हैं.

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