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Ajmer Sharif Dargah News: सूफी संतों की धरती और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल मानी जाने वाली अजमेर शरीफ दरगाह सदियों से अमन, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम देती आ रही है. देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर से लोग यहां सुकून और दुआ की तलाश में पहुंचते हैं. इसी कड़ी में नेशनल डिफेंस कॉलेज (NDC) का एक आला-सतही वफद अपने स्टडी टूर प्रोग्राम के तहत अजमेर पहुंचा और आलमी मशहूर सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह की पाकीजा दरगाह पर जियारत की.
इस दौरान वफद के सदस्यों ने दरगाह में चादर पेश की और देश में अमन-चैन और भाईचारे के कायम रहने की दुआ मांगी. दरगाह परिसर में वफद ने अदब और अकीदत के साथ हाजिरी लगाई और सूफी परंपराओं को नज़दीक से देखा. नेशनल डिफेंस कॉलेज की यह टीम देश के अलग-अलग राज्यों के दौरे पर है. इस स्टडी टूर का बुनियादी मकसद भारतीय शिक्षा प्रणाली, प्रशिक्षण व्यवस्था और देश की रणनीतिक विरासत को नजदीक से समझना बताया गया है. इसी सिलसिले में अजमेर शरीफ दरगाह को भी इस दौरे का अहम हिस्सा बनाया गया.
नेशनल डिफेंस कॉलेज के वफद के अजमेर शरीफ दरगाह पहुंचने पर दरगाह कमेटी इंतजामिया की ओर से पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया गया. अजमेर दरगाह प्रशासन ने वफद के सदस्यों को दरगाह के इतिहास, सूफी रिवाजों और गंगा-जमुनी तहजीब से जुड़ी अहम जानकारियां दीं. वफद को बताया गया कि यह दरगाह सदियों से आपसी भाईचारे, धार्मिक सहिष्णुता और इंसानियत का संदेश देती आ रही है.
अधिकारियों ने वफद को यह भी बताया कि ख्वाजा साहब की दरगाह पर हर धर्म, जाति और वर्ग के लोग आते हैं और यही इसकी सबसे बड़ी पहचान है. यहां मजहबी सीमाओं से ऊपर उठकर लोग एक-दूसरे के लिए दुआ करते हैं, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता को दर्शाता है.
इस मौके पर नेशनल डिफेंस कॉलेज के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस तरह के अध्ययन दौरे न सिर्फ देश की सांस्कृतिक विरासत को समझने में मदद करते हैं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और आपसी समझ को भी मजबूत करते हैं. उन्होंने कहा कि अजमेर शरीफ जैसी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक जगहों का दौरा देश की आत्मा को समझने का मौका देता है.
स्टडी टूर कार्यक्रम के तहत यह टीम अजमेर के अन्य ऐतिहासिक स्थलों और शैक्षणिक संस्थानों का भी दौरा करेगी. इसके जरिए वफद भारतीय इतिहास, संस्कृति, शिक्षा और रणनीतिक दृष्टिकोण को व्यापक रूप से समझने का प्रयास करेगा.