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Nepal News: नेपाल इस वक़्त बेहद नाजुक दौर से गुज़र रहा है. पूरा देश सरकार के खिलाफ होने वाले हिंसक आन्दोलनों और विरोध- प्रदर्शनों की चपेट में हैं. देश का युवा आन्दोलन के लिए सड़कों पर उतर आया है. भीड़ ने संसद भवन पर हमला कर दिया है. इस हिंसक आन्दोलन में अबतक 20 लोगों की मौत हो चुकी है. इस तरह का आन्दोलन कभी श्रीलंका, बांग्लादेश, ईराक और ब्राजील में भी हो चुका है. अब नेपाल इस तरह के आन्दोलन का गवाह बन रहा है. इस बीच खबर आ रही है नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है..
ये आन्दोलन सरकार के फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, एक्स समेत 26 प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाए जाने के साथ शुरू हुआ है. सरकार का आरोप है कि फर्जी खातों से देश विरोधी गतिविधियां हो रही थी, जबकि जनता इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बता रही है. इस आन्दोलन में देश का नौजवान तबका हिस्सा ले रहा है.
ख़ास बात यह है कि नेपाल दुनिया का पहला और एकमात्र हिन्दू राष्ट्र है. लेकिन यहाँ बौद्ध और कुछ मुस्लिम आबादी भी रहती है. इस आन्दोलन के बाद लोग जानना चाह रहे हैं कि नेपाल में मुस्लिम की कितनी आबादी है, और वहां उनकी सामाजिक, आर्थिक और राजनितिक हैसियत क्या है?
नेपाल में मुसलमान देश की तीसरी सबसे बड़ी धार्मिक आबादी हैं. हालिया जनगणना 2021 के मुताबिक, देश की कुल आबादी का 5.09 फीसद हिस्सा मुस्लिम है. इसके मुकाबले, नेपाल की ज्यादातर आबादी हिंदू धर्म को मानती है, जिनकी हिस्सेदारी 81.19 फीसद है, जबकि 8.21 फीसद लोग बौद्ध धर्म का पालन करते हैं. नेपाल की कुल आबादी 2.97 करोड़ है.
नेपाल मुस्लिम समुदाय की आबादी में पिछले एक दशक में इज़ाफा देखा गया है. 2011 की जनगणना में यह आंकड़ा लगभग 4.4 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 5 प्रतिशत से अधिक हो गया है. वहीं, हिंदू और बौद्ध आबादी में मामूली गिरावट देखने को मिली है. यहां ज्यादातर सुन्नी मुस्लिम रहते हैं.
कई रिपोर्ट्स के मुताबिक नेपाल में मुस्लिम समुदाय को आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े हुए वर्गों में गिना जाता है. तराई क्षेत्र, जहां मुस्लिम आबादी का लगभग 95 फीसद हिस्सा निवास करता है, वहां इस समुदाय को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक अवसरों की गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. संयुक्त राष्ट्र और अन्य संगठनों ने अपनी रिपोर्ट्स में बताया है कि नेपाल का मुस्लिम समुदाय विकास के कई मानकों पर कमजोर हालात में है. नेपाल के संविधान में मुसलमानों को हाशिये पर रखा गया समुदाय बताया गया है, जिसे सिविल सेवा में नौकरियों में कोटा देने की बात की जाती है.
नेपाल की मुस्लिम आबादी अहम तौर पर तराई इलाके में बसती है, जो भारत से एकदम सटा हुआ इलाका है. यह समुदाय आकार में छोटा जरूर है, लेकिन हाल के सालों में इनकी तादाद में धीरे-धीरे इज़ाफा हुआ है. दूसरी ओर, हिंदू और बौद्ध समुदाय देश की बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और नेपाल की धार्मिक संरचना में प्रमुख भूमिका निभाते हैं.
नेपाल में मुसलमानों की आबादी अब 5 प्रतिशत से अधिक हो गई है, लेकिन उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति अभी भी कमजोर बनी हुई है. तराई इलाके में फोकस्ड यह समुदाय शिक्षा और विकास के अवसरों से अपेक्षाकृत वंचित है. जबकि हिंदू और बौद्ध जनसंख्या बड़ी संख्या में मौजूद है.