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Delhi News Today: भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर देश के खिलाफ रची जा रही बड़ी साजिश को बेनकाब कर दिया है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आतंकवादी संगठन हिज़्ब-उत-तहरीर (Hizb-ut-Tahrir या HUT) से जुड़े तीन कट्टरपंथियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है. इन लोगों पर न सिर्प भारत में इस्लामी खिलाफत स्थापित करने की साजिश रचने का आरोप है, बल्कि विदेशी ताकतों से सैन्य सहयोग लेने की कोशिश और नौजवानों को उकसाकर आतंकी सरगर्मियों में शामिल करने की भी बात सामने आई है.
एनआईए ने हिज़्ब-उत-तहरीर नाम के प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन के तीन गुर्गों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है. इन लोगों पर संगठन की विचारधारा को बढ़ावा देने और विदेशी स्रोतों से पैसा जुटाकर आतंकी सरगर्मियों को अंजाम देने की साजिश रचने का इल्जाम है. आरोपियों के नाम कबीर अहमद अलियार उर्फ कबीर अहमद, अजीज अहमद उर्फ जलील अजीज अहमद) और बावा बहरुदीन उर्फ मन्नाई बावा हैं.
इन लोगों ने भारत विरोधी ताकतों से सैन्य मदद लेने और HUT के संस्थापक तकी अल-दीन अल-नभानी के लिखे संविधान को लागू करने की योजना बनाई थी. इसका मकसद भारत में इस्लामी खिलाफत की स्थापना करना था. जांच में पता चला है कि इन आरोपियों ने हज और उमराह यात्रियों के जरिए पाकिस्तानी सेना से समर्थन हासिल करने की भी कोशिश की थी.
जांच में सामने आया है कि इन लोगों ने संगठन के संस्थापक तकी अल-दीन अल-नभानी के जरिये तैयार 'इस्लामी संविधान' को भारत में लागू करने की योजना बनाई थी. इसके लिए उन्होंने ईरान, तुर्की, मिस्र और पाकिस्तान जैसी मुस्लिम बहुल देशों की सैन्य ताकत को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने वाली प्रदर्शनी भी आयोजित की थी. इस प्रदर्शनी का मकसद लोगों को हिंसक जिहाद और सरकार के खिलाफ विद्रोह के लिए हौसलाअफजाई करना था.
एनआईए की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी देश के भीतर खुफिया क्लासेज चला रहे थे, जिनमें नौजवानों को HUT की कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने की कोशिश हो रही थी. इन क्लासेज में कमजोर या बेरोजगार नौजवानों को टारगेट कर उनके दिमाग में इस्लामी खिलाफत की सोच भरने की कोशिश की जा रही थी.
हैरानी की बात यह भी है कि इन आतंकियों ने हज और उमराह यात्रियों के ज़रिये पाकिस्तान की सेना से मदद लेने की योजना भी बनाई थी. इसका मकसद था भारत सरकार को अस्थिर करना और देश में इस्लामी शासन लागू करना. गौरतलब है कि भारत सरकार ने अक्टूबर 2023 में हिज़्ब-उत-तहरीर को एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था. एनआईए ने बताया कि यह मामला अभी जांच के दायरे में है और अन्य संभावित साजिशकर्ताओं की पहचान के लिए छानबीन जारी है.