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नई दिल्ली: 2020 में देश में कोविड की पहली लहर के दौरान कोविड फैलाने का सारा इलज़ाम तबलीगी जमात और उसके हेड मौलाना साद पर मढ़ दिया गया था. तबलीगी जमात का दिल्ली का निजामुद्दीन मरकज, जमाती और मौलाना साद रातों- रात खलनायक बन गए थे. इस बहाने देशभर के मुसलमानों को टारगेट किया गया. उन्हें देशद्रोही और गद्दार बताया गया.. लेकिन पांच साल बाद आज दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दिए अपने फाइनल जांच रिपोर्ट में कहा है कि तब्लीग़ी जमात के चीफ़ मौलाना साद के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है. इससे पहले कोर्ट ने तबलीगी जमात से जुड़े दर्ज़नों लोगों को यह कहते हुए बरी कर दिया था कि कोविड फैलाने ने उनका कोई योगदान नहीं था.
गौरतलब है कि कोविड के दौरान दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज में एक प्रोग्राम का आयोजन हुआ था, जिसमें देश- विदेशों से आये जमाती ने हिस्सा लिया था. इसके बाद कुछ जमाती कोविड पॉजिटिव पाए गए थे. उस वक़्त देशभर में लॉकडाउन और कोविड प्रोटोकॉल लागू था. इल्ज़ाम था लगाया गया कि इस इज्तेमा से बीमारी फैलने का खतरा बढ़ा और नियमों की अनदेखी की गई. इसी बुनियाद पर 31 मार्च 2020 को मौलाना साद और दीगर लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी.
मौलाना साद भड़काऊ भाषण देने का इलज़ाम
मौलाना साद पर इल्ज़ाम लगाया गया था कि उन्होंने लॉकडाउन में लोगों को भड़काया था. सोशल मीडिया पर एक ऑडियो रिकॉर्ड वायरल हुआ था, जिसमें यह दावा किया गया था कि मौलाना साद ने तबलीगी जमात के लोगों को कोविड गाइडलाइंस की ख़िलाफ़वर्ज़ी करने के लिए उकसाया था. दिल्ली पुलिस ने इल्ज़ाम लगाया था कि इन्होंने टूरिस्ट वीज़ा के ज़रिए हिंदुस्तान में एंट्री ली और मरकज़ में हुए इज्तेमा में हिस्सा लिया. इस मामले में 36 अलग- अलग देशों से आये कुल 952 विदेशी तबलीगी जमात के सदस्यों पर भी मुकदमा दर्ज किया गया था. इनमें से 44 आरोपियों ने ट्रायल का सामना किया था, जबकि 908 ने जुर्म क़ुबूल कर 4 हज़ार से 10 हज़ार तक जुर्माना भर दिया.
निशाने पर आया था देशभर का मुसलमान
निजामुद्दीन मरकज़ और तबलीगी जमात की आड़ में पूरे देश के मुसलमानों को निशाना बनाया गया. उन्हें कोरोना बम तक कहा जाने लगा. कोविड से होने वाली एक- एक मौत के लिए तबलीगी जमात और देश के मुसलमानों को जिम्मेदार ठहराया जाने लगा. अखबारों ने तबलीगी जमात से फैले कोविड के आंकड़े पब्लिश किये और न्यूज़ चैनलों ने इसपर डिबेट किया. दिन भर ख़बरें चलाई.
पुलिस जांच में कुछ नहीं मिला
पांच साल बाद दिल्ली पुलिस की जांच में अब इस ऑडियो और उससे जुड़े दीगर डिजिटल सबूतों में जुर्म साबित करने के लिए कोई मुजरिमाना सबूत नहीं मिला है. दिल्ली पुलिस ने अदालत को जानकारी दी है कि मौलाना साद की स्पीच से जुड़े मवाद की जांच की गई, लेकिन इनमें कोई भी क़ाबिले ऐतराज़ बात नहीं मिली. पुलिस ने उनके लैपटॉप से बरामद स्पीचों की बारीकी से जांच की और नतीजा निकाला कि इनमें किसी भी तरह की भड़काऊ या मुतनाज़ा बयान मौजूद नहीं है.
हाई कोर्ट ने रद्द किया था 70 जमातियों के खिलाफ केस
इससे पहले जुलाई 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने तबलीगी जमात के 70 लोगों के खिलाफ दर्ज FIR और चार्जशीट को रद्द कर दिया. ये केस कोविड-19 के फैलाव और लॉकडाउन की ख़िलाफ़वर्ज़ी से जुड़े मार्च 2020 में दर्ज किये गए थे. दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने हुक्म में कहा था कि चार्जशीट में कहीं ये नहीं कहा गया है कि जमाती की वजह से ही कोविड-19 फैला था. हाईकोर्ट ने ये कहा था कि ये लोग लॉकडाउन की वजह से मरकज़ में रहने पर मजबूर थे. उनके पास बाहर निकलने का कोई ज़रिया नहीं था और बाहर निकलना खुद लॉकडाउन की ख़िलाफ़वर्ज़ी होती. ऐसा कोई इल्ज़ाम नहीं है कि इन जमाती में से कोई कोविड पॉजिटिव था या उन्होंने निगरानी अमले के साथ कोई बदसुलूकी की हो.
जमातियों से माफ़ी मांगनी चाहिए
पुलिस की इस जांच रिपोर्ट के बाद आप पार्टी के प्रवक्ता मजीद अली का कहना है कि मुसलमान को बदनाम करने के लिए साजिश रची गई. सबसे पहले प्लाज्मा तब्लीबी जमात ने ही दिया था कोविड वालो को. मीडिया और दिल्ली पुलिस को अब उनसे माफी मांगनी चाहिए.
वहीँ, मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली का कहना है मौलाना साद साहब को परेशान किया गया और तब्लीबी जमात को बदनाम करने के लिए इस तरह का काम किया गया. अब उन्हें क्लीन चिट मिल गई है, यह खुशी की बात है जिन लोगों ने परेशान किया उनका माफी मांगनी चाहिए.
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