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Zee SalaamIndian Muslimन ट्रेनिंग न कोई कम्पटीशन और 90 हज़ार तक सैलरी, मदरसा शिक्षकों की नियुक्ति पर सरकार की गिद्ध दृष्टि!

न ट्रेनिंग न कोई कम्पटीशन और 90 हज़ार तक सैलरी, मदरसा शिक्षकों की नियुक्ति पर सरकार की गिद्ध दृष्टि!

UP  Madarsa Teachers Appointment Rule: उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा है कि अब सरकारी मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति कमीशन के जरिये होगी, जिसके बाद शिक्षक नियुक्ति में मदरसों के मैनेज्मेंट कमिटियों का एकाधिकार ख़त्म हो जाएगा.सरकार के इस फैसले के बाद मदरसा संचालकों ने इसका विरोध किया है, और इस प्रस्ताव का मनमाना और अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला बताया है. आईए समझते हैं कि मदरसों में अबतक नियुक्तियां कैसे होती हैं, शिक्षकों की क्या योग्यता तय की जाती है, और उनका वेतनमान क्या होता है? कमीशन से नियुक्ति से कैसे संवैधानिक अधिकारों में टकराव पैदा होगा? 

न ट्रेनिंग न कोई कम्पटीशन और 90 हज़ार तक सैलरी, मदरसा शिक्षकों की नियुक्ति पर सरकार की गिद्ध दृष्टि!

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के मदरसे लगातार सरकार के निशाने पर हैं. गैर-पंजीकृत मदरसों और कथित तौर पर सरकारी ज़मीन में बने सैकड़ों मदरसों पर बुल्डोज़र चलाकर ढहाने या उसपर ताला लगाने के बाद अब सरकार की नज़र सरकारी मदरसों में होने वाली शिक्षक भर्ती की प्रक्रियाओं पर है.

राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओपी राजभर ने 7 दिसम्बर को बहराइच में एक अवामी खिताब में कहा था कि सरकारी मदरसों के सिलेबस में NCERT, ICSC और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के निसाब शामिल करने के साथ ही वहां होने वाली शिक्षक भर्ती प्रक्रियाओं में सरकार बदलाव करने जा रही है. राजभर ने कहा है कि सरकारी मदरसों में शिक्षकों की भर्ती अब आयोग के जरिये की जायेगी जैसा की आम तौर पर सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की भर्तियाँ होती हैं. 

राजभर के इस बयान के दो दिन बाद 9 दिसम्बर को ही अल्पसंख्यक कल्याण के निदेशक और मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार ने सभी जिले के अल्पसंख्यक अफसरान को 3 दिन के अंदर मदरसा शिक्षकों की जानकारी मांगी है.सरकार ने इस आदेश में 29 मई 2025 को विधानसभा हाउस में हुई उस ऑडिट रिपोर्ट की बैठक का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया था कि मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति में बड़े पैमाने पर धांधली की खबरें सामने आयी हैं. सरकारी मदरसों में प्रबंधन ने मदरसा नियमवाली 2016 का उल्लंघन कर अपने रिश्तदारों की नियुक्तियां की है. 

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मदरसों को भेजे गए आदेश में कहा गया है कि सभी मदरसों में मैनेजमेंट कमिटी इस बात का हलफनामा देंगे कि उनके मदरसे में सभी नियुक्तियां मदरसा नियमावली 2016 के तहत की गई है, और कमिटी के किसी भी नजदीकी रिश्तेदारों को नियुक्त नहीं किया गया है. 

सरकार के इस आदेश के बाद एक बार फिर मदरसा संचालकों के साथ ही मुस्लिम समाज इस बात से डर गया है कि सरकार नए बहाने से सरकारी मदरसों का अनुदान बंद करने, मान्यता रद्द करने या फिर उसमें अपने लोग थोपने की कोशिश करेगी. इस तरह मदरसों के संचालन में सरकार दखल देने का काम करेगी.  
अगर ऐसा होगा तो उत्तर प्रदेश के 560 सरकारी मदरसे और वहां पढ़ाने वाले लगभग 8,400 सरकारी मदरसा शिक्षकों के भविष्य पर संकट पैदा हो सकता है. 

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मदरसों में अभी कैसे हो रही है नियुक्ति ?

सरकारी मदरसों में 5 सदसीय कमिटी की सिफारिश पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नियुक्ति करता है, और फिर उस फाइनल नाम पर मदरसा बोर्ड मुहर लगाता है. इस कमिटी में एक मदरसा का अध्यक्ष, एक सेक्रेट्री, प्रिंसिपल और दो बाहर के लोग होते हैं. आम तौर पर अध्यक्ष की सहमति पर सेक्रेट्री ही शिक्षकों के नाम की फाइल लिस्ट जिला माइनॉरिटी ऑफिसर (DMO) को भेजता है. हालांकि, इस नियुक्ति में मदरसा नियमावाली 2016 का पालन करना ज़रूरी होता है, जिसमें साफ़- साफ़ कहा गया है कि मदरसा प्रबंधन समिति के 5 सदस्यों में से किसी भी सदस्य के नजदीकी किसी रिश्तेदारों की नियुक्ति शिक्षक के तौर पर नहीं की जायेगी. 
 

मदरसों का स्तर और शिक्षकों की योग्यता 

आमतौर पर मदरसे चार स्तर के होते हैं. कक्षा पहली से लेकर पांचवी यानी प्राइमरी तक, जिसे तहतानिया कहा जाता है. कक्षा 6 से 8 माध्य या मिडिल, जिसे फौकानिया कहा जाता है. कक्षा  9 से 10 माध्यमिक या हाई स्कूल, जिसे आलिया कहा जाता है. कक्षा 11 से 12 उच्चतर माध्यमिक या हायर सेकंड्री, इसे उच्च आलिया कहा जाता है.
कुछ मदरसों में कामिल (BA) और फ़ाज़िल(MA) की भी पढाई हो रही थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 1 जून 2025 को इसपर ये कहते हुए इसपर रोक लगा दी कि कोई स्कूल और स्कूल में पढ़ाने वाला शिक्षक ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई कैसे करा सकता है, और डिग्री कैसे दे सकता है. ये उच्च शिक्षण संस्थाओं को नियमन करने वाली संस्था UGC के नियमों के खिलाफ है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि कामिल और फाजिल की पढ़ाई, सिलेबस और इसकी डिग्री के लिए इन पाठ्यक्रमों को किसी यूनिवर्सिटी से जोड़ा जाए.सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से प्रदेश में एक साथ 34 हज़ार विद्यार्थी प्रभावित हुए थे, जो कामिल और फाजिल की पढाई कर रहे थे. हालांकि, प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक राज्य मंत्री दानिश अंसारी ने उस वक़्त कहा था कि कामिल और फाजिल की डिग्रियों की बुनियाद पर सरकारी नौकरी कर रहे किसी भी कर्मचारी की नौकरी पर कोई आंच नहीं आएगी.  

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मदरसा शिक्षकों की योग्यता 

मदरसों में शिक्षकों की भर्ती का बैसिक पैमाना वो ही है जो स्कूलों में होता है, लेकिन यहाँ शिक्षण प्रशिक्षण की अनिवार्यता नहीं रखी गई है.कक्षा पहली से लेकर पांचवी यानी तहतानिया में 10 वीं पास आदमी, कक्षा 6 से 8 मिडिल या फौकानिया में इंटर पास और कक्षा  9 से 10 आलिया और कक्षा 11 से 12 उच्चतर माध्यमिक या उच्च आलिया में कामिल (BA) और फ़ाज़िल(MA) पास आदमी टीचर बन सकता है. इन सभी के साथ ये शर्त रखी जाती है कि वो विषय के रूप में उर्दू, अरबी और फ़ारसी का अध्ययन कर चुके हों.इसमें किसी यूनिवर्सिटी से पास ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट भी शिक्षक बनने के पात्र होते हैं. लेकिन हमेशा मदरसे से फारिग (शिक्षित) उमीदवारों को तरजीह दी जाती है. चूंकि, आजतक किसी मदरसे में कामिल(ग्रेजुएशन) और पोस्ट ग्रेजुएशन शिक्षकों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की भर्ती ही नहीं हुई तो, निम्न कक्षा में पढ़ाने वाले शिक्षक ही उन्हें पढ़ा रहे थे. 
 

सरकारी मदरसा शिक्षकों का वेतनमान 

कक्षा 1 से लेकर 5 तहतानिया के शिक्षकों को (4200), कक्षा 6 से 8 फौकानिया को (4600), कक्षा  9 से 10 आलिया और उच्च आलिया यानी उच्चतर माध्यमिक के शिक्षकों को (4800) पेय ग्रेड वाला वेतनमान दिया जाता है. 7वां वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद 4200 पे ग्रेड वाले प्राइमरी मदरसा शिक्षकों की सैलरी 35000 से 1, 12000 तक हो सकती है. इनकी इन्हैंड सैलरी 45 से 60 हज़ार के बीच होती है. फौकानिया 4600 पे बैंड वालों की सैलरी 45 हज़ार से 1 लाख  12  हज़ार तक हो सकती है. इनकी इन्हैंड सैलरी 60 हज़ार तो हो सकती है. वहीँ उच्चतर माध्यमिक शिक्षकों की  4800 पे ग्रेड की सैलरी 47 हज़ार से शुरू होती है जो 1 लाख 22 हज़ार तक जाती है.इनके हाथ में 80 से 90 हज़ार तक आते हैं. 

लखनऊ में एक बड़े मदरसे के संचालक याकूब कुरैशी कहते हैं, सरकारी मदरसों में नौकरी मिलने के बाद अच्छा वेतनमान मिलता है, जबकि नौकरी लेना उतना मुश्किल नहीं है, जितना एक स्कूल का शिक्षक बनना है. यहाँ अभी भी बीएड या बीटी जैसे शिक्षक प्रशिक्षण की डिग्री की अनिवार्यता नहीं है.   
 

मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति में भाई-भातीजाबाद के आरोपों पर आल इंडिया मदरसा टीचर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष मोहम्मद सगीर आलम कहते हैं, " उत्तर प्रदेश के सरकारी मदरसों में जो भी नियुक्तियां होती हैं,वो सभी मदरसा नियुक्ति नियमावली 2016 के मुताबिक होती है. इसमें साफ- साफ़ लिखा है कि उमीदवार कमिटी के किसी सदस्य का नजदीकी रिश्तेदार नहीं हो सकता है. सभी मदरसे इस नियम का पालन करते हैं. अगर कहीं किसी ने इस नियम की अवहेलना की हो तो वो अपवाद हो सकता है, और अपवाद कहाँ नहीं हैं? क्या स्कूल-कालेजों में होने वाली नियुक्तियों में गड़बड़ियाँ नहीं होती है? तो क्या इसके लिए पूरी व्यवस्था को करप्ट मान लिया जाएगा?" 

आगरा के मदरसा संचालक हाजी जमील इस कमीशन के जरिये मदरसों में शिक्षक भर्ती के सवाल पर कहते हैं, " सरकार अगर ऐसा करती है, तो ये पूरी तरह मुसलमानों के सम्वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा. फंडामेंटल राईट के आर्टिकल 28 से 30 में इस बात का साफ़-साफ़ जिक्र किया गया है कि देश का अल्पसंख्यक समूह अपने पसंद की शैक्षणिक संस्थानों का सञ्चालन और नियमन कर सकता है. सरकार उसे आर्थिक सहायता देने में किसी तरह का भेदभाव नहीं करेगी. अगर सरकार खुद मदरसों का सिलेबस तय करेगी, मदरसों का शिक्षक नियुक्त करेगी तो फिर मदरसा खोलने और चलाने का मतलब ही क्या रह जाएगा? " मदरसों में विशेष शिक्षा दी जाती है, जिसके लिए विशेष योग्यता वाले शिक्षकों की ज़रुरत होती है. इसमें अगर सरकार दखलअंदाजी करती है, तो ये हमारे अधिकारों पर हमला होगा. 
 

वहीँ, मदरसा निजामिया कादरिया,प्रयागराज के प्रिंसिपल एजाज़ अहमद कहते हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि नियुक्ति कमीशन से होगी या मदरसा कमिटी की सिफारिश से होगी. सरकार अगर नियम बनाती है कि भर्तियाँ कमीशन से होगी, तो लोग उसी हिसाब से अपनी तैयारी करेंगे. मदरसा में पढ़ाने वाले लोग भी बीएड और BT जैसे शिक्षक प्रशिक्षण लेंगे और फिर नौकरी लेंगे.जब जो व्यवस्था रही है, उस हिसाब से नियुक्तियां होती है.    

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