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Kangra Cow Rescue: देश के कई राज्यों में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. हिमाचल प्रदेश में भी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. पौंग बांध से छोड़े गए पानी ने जब व्यास नदी का रौद्र रूप दिखाया, तो उसकी उफनती लहरें किनारों को चीरती हुई गांवों के आसपास तबाही मचाने लगीं. इस दौरान रियाली पुल के पास एक छोटे से टापू पर लगभग 25 से 30 गायें कई दिनों से भूखी-प्यासी फंसी हुई थीं. किसी ने उन पर तब तक ध्यान नहीं दिया जब तक एक आम कुत्ता किसी फरिश्ते की तरह वहां नहीं आ गया.
रियाली गांव के निवासी रमेश कालिया बताते हैं कि शाम के करीब 4 बजे थे. बारिश की आवाज और पौंग डैम के पानी के शोर के बीच, अचानक एक कुत्ता उनकी ओर दौड़ता हुआ आया. उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी, सांसें तेज चल रही थीं और वह लगातार भौंक रहा था. पहले तो रमेश ने उसे हटाने की कोशिश की, लेकिन कुत्ता अपनी जगह पर डटा रहा. मानो कह रहा हो, "आओ, जल्दी से मेरे साथ आओ."
कुत्ते की हरकतों से प्रभावित होकर गांव वाले उसके पीछे चल पड़े. लगभग 900 मीटर तक वह रास्ता दिखाता रहा और फिर अचानक रुक गया. सामने का दृश्य देखकर सभी दंग रह गए. व्यास नदी के बीचों-बीच एक छोटे से टापू पर दर्जनों गायें खड़ी थीं. चारों तरफ उफनती लहरें और बीच में बेबस, भूखी-प्यासी गायें थीं. जैसे ही यह खबर गांव में फैली, लोग मदद के लिए जुट गए. किसी ने पेड़ों की टहनियां काटीं, तो किसी ने हरी पत्तियां इकट्ठी कीं. देखते ही देखते लगभग 24 क्विंटल चारा इकट्ठा हो गया. अब सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मौत से खेलती उस नदी को कौन पार करके टापू पर जाएगा.
इसी बीच, रिटायर्ड सेना के जवान नूर मोहम्मद और उनके दोस्त संजीव अली आगे आए. दोनों ने बिना देर किए एक नाव में चारा भरा और ठंडी, तेज और खतरनाक लहरों से जूझते हुए आगे बढ़े. आखिरकार नाव टापू पर पहुंची. जैसे ही चारा जमीन पर रखा गया, भूखी गायें उस पर टूट पड़ीं. लगभग 7 दिनों से उनके पेट खाली थे. गांव वालों ने राहत की सांस ली, लेकिन असली काम अभी बाकी था. इन मूक प्राणियों को सुरक्षित बचाना.
गांव रात भर बेचैन रहा. अगली सुबह रमेश और गांव के लोग फिर इकट्ठा हुए. इस बार तहसीलदार से मदद मिली और पास के गांव से तैराकों को बुलाया गया. पानी का बहाव 16 से 18 फीट ऊंचा था, लेकिन तैराकों ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने रस्सियों की मदद से एक कड़ी बनाई और एक-एक करके सभी गायों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया.