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दिल्ली ब्लॉस्ट की घटना के बाद मुसलमानों के खिलाफ नफरत और हिंसा की घटनाएं बढ़ चुकी हैं. इस दौरान हरियाणा और उत्तर प्रदेश में बहुसंख्यक समुदाय के लोगों ने मुस्लिम किरायेदारों को घरों से निकाल दिया. वहीं, गुजरात में मुस्लिम दुकानदारों को संदेह की नजर से देखा जाने लगा, जबकि उत्तर प्रदेश कश्मीरी मुस्लिम छात्रों को हॉस्टल से निकालने की घटनाएं सामने आई हैं. सोशल मीडिया पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ देशद्रोही, गद्दार समेत कई आपत्तिजनक शब्द इस्तेमाल किए गए.
मुसलमानों के खिलाफ बढ़ती नफरत और हिंसा के बाद नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) अजित डोभाल की एक पुरानी वीडियो सामने आई है, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. दिल्ली ब्लॉस्ट की घटना के बाद जब अजित डोभाल की वीडियो वायरल होने लगी तो उनका बयान भी सामने आया. एक न्यूज चैनल से बातचीत में डोभाल ने इस 'डीपफेक' वीडियो करार दिया. इस इंटरव्यू में अजित डोभाल ने कहा कि उन्होंने कभी इस तरह की कोई बात ही नहीं की और ऐसा शायद लोगों के विचार बदलने के लिए बनाया गया हो.
हालांकि, लल्लन टॉप ने जब इस वीडियो की जांच की तो NSA चीफ अजित डोभाल के दावों के यह उलट सही पाई गई. दरअसल, अजित डोभाल ने यह बयान 11 मार्च 2014 को ऑस्ट्रेलिया इंडिया इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में दिया था. इस वीडियो NSA चीफ अजित डोभाल ने कहा कि "उलेमाओं से बात करना, उन्हें साथ जोड़ना, संयुक्त रणनीति बनाना और उन्हें भागीदार बनाना ही आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका है. उन्हें मनाना और उनके साथ साझेदारी बनाना जरूरी है."
इस कार्यक्रम में अजित डोभाल ने भारत में इस्लामिक आतंकवाद, मुस्लिम समुदाय की भूमिका, खुफिया एजेंसियों के आंकड़ों और उनका सियासी इस्तेमाल को लेकर भी कई बड़ी बातें कही. डोभाल ने कहा कि, "इस्लामिक आतंकवाद की वजह से मरने वालों में 90 फीसदी से ज्यादा लोग मुसलमान हैं और महज 10 फीसदी ही गैर-मुस्लिम है. मुस्लिम समुदाय इस बात को बहुत अच्छी से तरह से जानता है."
अजित डोभाल को आगे कहते हुए सुना जा सकता है कि "हालिया इंटरसेप्ट्स के आधार पर, जिनके चलते एंटी-टेरर सुरक्षा दी गई है, वह सुरक्षा सभी शीर्ष भारतीय इस्लामिक स्कॉलर को इसलिए दी गई क्योंकि वे इंडियन मुजाहिदीन की टारगेट लिस्ट में शामिल थे." उन्होंने कहा, "इसे हल्के में मत लीजिए. भारतीय मुसलमानों को भागीदार बनाइए. वे हमेशा तैयार रहे हैं, इतिहास में भी थे और भविष्य में भी रहेंगे. उन्हें वोट बैंक मत बनाइए. उन्हें अपने सियासी मकसद के लिए इस्तेमाल मत कीजिए बल्कि देश के मकसद के लिए इस्तेमाल कीजिए. वे किसी से कम राष्ट्रवादी नहीं हैं."
अजित डोभाल ने कहा कि जब सियासी दल मुसलमानों को वोट बैंक के रूप में देखते हैं, तभी 'ट्रेड-ऑफ' के हालात बनते हैं. उन्होंने कहा कि जब किसी समुदाय को यह महसूस कराया जाता है कि वे पीड़ित हैं, तो उन्हें असुरक्षित महसूस कराया जाता है. असुरक्षा की यह भावना सियासी लिहाज से भुनाई जाती है. उन्होंने कहा, "मैं पीड़ित नहीं हूं. यह मेरा देश है. अगर मैं मुसलमान हूं, तो क्या? मैं इसकी रक्षा वैसी ही करूंगा जैसे कोई अन्य करेगा. 1857 में किसने लड़ाई लड़ी? मुसलमानों ने भी उतना ही लड़ा जितना हिंदुओं ने."
अजित डोभाल ने ISI से जुड़े मामलों पर भी वीडियो में बड़ा दावा किया. डोभाल का बयान, हिंदूवादी संगठनों के आरोपों, अल्पसंख्यकों को आतंकी घटनों के लिए जिम्मेदार ठहारना और फिर इसकी आड़ में हिंसा का शिकार बनाने, को लेकर आईना दिखाया है. इस में NSA प्रमुख कहते हैं, "अब जब मैं एक शख्स के रूप में एक्सपोज हो चुका हूं, मैं आपको एक बात बता दूं कि ISI ने भारत में खुफिया काम के लिए जितने लोगों को भर्ती किया है, उनमें मुसलमानों से ज्यादा हिंदू रहे हैं."
डोभाल ने कहा, "1947 से अब तक ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत जितने भी जासूसी के मामले में सामने आए हैं, उनमें 4,000 से ज्यादा मामलों में शायद 20 फीसदी भी मुस्लिम नहीं होंगे. इसके उलट 80 फीसदी हिंदू समुयाद के लोग है." उन्होंने कहा कि "मीडिया और लोगों को यह समझना चाहिए कि यह एक गलत धारणा है कि जासूसी या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में मुसलमान ही शामिल होते हैं. उन्होंने दोहराया कि भारत को आगे बढ़ाने के लिए मुसलमानों को साथ लेकर चलना होगा और इसी से देश महान बनेगा."