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Odisha News Today: साल 2024–2025 में देशभर में बड़ी संख्या में बांग्ला बोलने वाले मुसलमानों पर शासन प्रशासन के जरिये कार्रवाई की गई. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अवैध प्रवासियों की पहचान के नाम पर बीजेपी शासित राज्यों खासकर असम, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में पुलिस कार्रवाई बढ़ी है. हिरासत, जबरन बेदखली, गोलीबारी और बांग्लादेश भेजने जैसी कार्रवाइयों में अक्सर भारतीय नागरिक भी फंस गए हैं.
सामाजिक कल्याण के कामों में जुटे संगठनों का आरोप है कि धार्मिक और भाषाई पहचान के आधार पर विशेष समुदाय को निशाना बनाए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही है. इसी तरह एक मामला पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से सामने आया है. कई मुस्लिम नौजवान सालों से ओडिशा के
में सामान बेचकर आजीविका चला रहे हैं. ये नौजवान अपनी दोपहिया गाड़ियों से गांव-गांव जाकर कंबल, मच्छरदानी और ऊनी कपड़े बेचते हैं। इसी दौरान बंगाली भाषा बोलने पर स्थानीय पुलिस ने उन्हें संदेह के दायरे में ले लिया.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने इन नौजवानो को रोहिंग्या या बांग्लादेशी बताते हुए 72 घंटे के भीतर ओडिशा छोड़ने का अल्टीमेटम दिया है. ओडा गांव की पुलिस ने पिछले हफ्ते ऐसे ही चार मुस्लिम नौजवानों को कारोबार छोड़कर राज्य से बाहर जाने का आदेश दिया था. निर्धारित समय सोमवार को पूरा हो गया.
रिपोर्ट में कहा गया है कि गुरुवार को ये चारों युवक ओडा गांव पुलिस स्टेशन पहुंचे और अपने आधार कार्ड व वोटर आईडी कार्ड दिखाए. इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें तीन दिनों के भीतर क्षेत्र छोड़ने की चेतावनी दी. आरोप है कि वर्दी में मौजूद एक अधिकारी ने उनसे कई बार बंगाली में बात करने पर सवाल उठाया और उन्हें रोहिंग्या और बांग्लादेशी कहकर टॉर्चर किया.
पुलिस ने जिन युवाओं को राज्य छोड़ने को कहा गया है, वे सभी मुर्शिदाबाद के डोमकल सब-डिवीजन के जंगली ब्लॉक अंतर्गत सागर पाड़ा ग्राम पंचायत के रहने वाले हैं। उनका कहना है कि वे पिछले कई सालों से इसी तरह ईमानदारी से व्यापार कर जीवनयापन करते आए हैं. बताया गया कि इस साल ओडिशा में पश्चिम बंगाल से आए कई मुस्लिम व्यापारी और मजदूरों को पुलिस हिरासत और भीड़ की हिंसा का सामना करना पड़ा है. इसी तरह 24 नवंबर को मुर्शिदाबाद के रहने वाले 24 साल के राहुल इस्लाम पर नयागढ़ जिले में भीड़ ने हमला कर दिया था.
रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उन्हें बांग्लादेशी कहकर पीटा गया, क्योंकि उन्होंने कुछ लोगों द्वारा लगाए गए धार्मिक नारे को दोहराने से मना किया था। राहुल भी ओडिशा में ऊनी कपड़ों की बिक्री करता था. स्थानीय संगठनों के मुताबिक, इस तरह की अन्य कई घटनाएं भी सामने आ रही हैं, जिनमें बाहर से आए मुस्लिम व्यवसायियों पर अवैध प्रवासी होने का आरोप लगाया जा रहा है और उन्हें क्षेत्र से जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है.