Pahalgam Attack: पहलगाम में हुए हमले में 26 लोगों की मौत हुई है. इस हमले से कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान के जनरल का बेतुका बयान आया था. जिसकी भारत ने आलोचना भी की थी. पूरी खबर पढ़ें.
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Pahalgam Attack: जम्मू-श्मीर के पहलगा में हुए हमले में 26 लोगों की जान गई है. जिसके बाद कई तरह के सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं. इस सब के बीच टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक एक सीनियर आर्मी अधिकारी का कहना है कि पाकिस्तान और पीओके में आतंकवादी ढांचा “पूरी तरह बरकरार है”, और अंदरूनी इलाकों में ट्रेनिंग कैंप्स और लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर “लॉन्च पैड” अभी भी मौजूद हैं.
यह हत्याकांड पिछले हफ़्ते पाक सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के जरिए टू नेशन सिद्धांत का हवाला देते हुए कश्मीर को इस्लामाबाद की “गले की नस” बताए जाने के तुरंत बाद हुआ है. उन्होंने कहा था कि हमारा रुख बिल्कुल साफ है कि यह (कश्मीर) हमारी गले की नस थी, यह हमारी गले की नस रहेगी, हम इसे नहीं भूलेंगे. हम अपने कश्मीरी भाइयों को उनके संघर्ष में नहीं छोड़ेंगे. हिंदुस्ता ने इस टिप्पणी को बकवास करार दिया था.
दिल्ली में सेना मुख्यालय, खासकर सैन्य अभियान निदेशालय, मंगलवार देर रात तक ताजा हालातों का आकलन कर रहा था. टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान के जरिए ट्रेन्ड आतंकवादी जम्मू-कश्मीर में घुसने के लिए दूसरे रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं, क्योंकि 778 किलोमीटर लंबी एलओसी पर मजबूत घुसपैठ रोधी ग्रिड ने वहां आतंकवादियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. पिछले साल एलओसी पर घुसपैठ की दस कोशिशें नाकाम की गईं, जिसमें 25 आतंकवादी मारे भी गए हैं.
हालांकि पहलगाम इलाके में सेना की कोई बड़ी तैनाती नहीं है, लेकिन इलाके में विशेष आतंकवाद रोधी बल राष्ट्रीय राइफल्स की एक यूनिट ने दोपहर में नरसंहार की खबर मिलते ही कुछ टुकड़ियां रवाना कर दी हैं. बता दें, कश्मीर में पिछले 2 सालों में 144 आतंकियों को मौत के घाट उतारा जा चुका है. अधिकारी ने कहा,"पाकिस्तान और पीओके में आतंकवादी बुनियादी ढांचा, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, यूजेसी और अल बद्र जैसी तथाकथित रणनीतिक संपत्तियां, जिहादी मदरसे और मदरसा नेटवर्क शामिल हैं, पूरी तरह से मौजूद है."