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Delhi News Today: भारत में TADA कानून के तहत उम्रकैद की सज़ा काट रहे पाकिस्तानी नागरिक खालिद महमूद ने एक बार फिर रिहाई की अपील की है. खालिद महमूद का कहना है कि उसकी गिरफ्तारी उस वक्त हुई थी जब वह नाबालिग था और अब वह लगभग 32 साल से जेल में बंद हैं. खालिद ने TADA कानून का हवाला देते हुए कहा कि उसको उम्रकैद से भी ज्यादा सजा दी जा चुकी है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खालिद महमूद को 1994 में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था. खालिद पर आरोप लगा था कि वे आतंकवादी हमलों की योजना बना रहे था और उसके पास से हथियार, विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी. इसके बाद उस पर आतंकवाद संबंधी कई धाराओं में केस दर्ज किया गया. साल 1996 में खालिद को उम्रकैद की सजा सुनाई गई. खालिद ने बताया कि गिरफ्तारी के समय वह 11वीं क्लास का छात्र था.
खालिद ने बताया कि उसे 17 फरवरी 1994 को राजधानी दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके से पुलिस ने पकड़ा था. खालिद ने कहा कि पाकिस्तान सरकार ने 2010 में उसे पासपोर्ट भी जारी किया था, जिसमें उसके नाबालिग होने का प्रमाण मौजूद है और गिरफ्तारी के समय उसकी उम्र महज 16 साल थी. खालिद के मुताबिक, TADA कानून के तहत नाबालिग होने पर ज्यादा से ज्यादा 3 साल की सजा होती है और अगर उम्रकैद भी मान ली जाए तो सजा 14 साल की होती है.
इंकलाब में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, खालिद महमूद ने दावा किया कि इसके बावजूद वह 32 साल से जेल की सलाखों के पीछे हैं, जिसे वे भारत-पाक संबंधों में नफरत की नफरत की सियासत का नतीजा बताता है. इससे पहले तिहाड़ जेल में 20 साल रहने के बाद खालिद ने दिल्ली हाई कोर्ट में नाबालिग होने के आधार पर रिहाई और पाकिस्तान वापस भेजे जाने की अपील दायर की थी. हाई कोर्ट ने उसकी दलीलों पर सहमति जताई थी और वह लगभग रिहाई के करीब था, लेकिन आखिरी वक्त में रुकावट आ गई.
हाई कोर्ट ने कहा था कि 1993 मुंबई ब्लास्ट केस के फैसले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि नाबालिग होने की दलील TADA सजा पर लागू नहीं होती. गौरतलब है कि TADA एक्ट मई 1995 में यानी खालिद की गिरफ्तारी के एक साल बाद निरस्त कर दिया गया था. खालिल की एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है. खालिद ने सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि जिन विदेशी कैदियों की सजा पूरी हो चुकी है, उन्हें उनके देश वापस भेजा जाए. खालिद महमूद पाकिस्तान के लाहौर का रहने वाला है. खालिद का कहना है कि वह अब भी अपनी रिहाई की उम्मीद में अदालतों का दरवाजा खटखटा रहा है.