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Nitish Kumar Hijab Controversy: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डॉक्टर नुसरत परवीन को सर्टिफिकेट देते वक़्त उनका हिजाब खींच दिया. यह घटना पूरे देश में आग की तरह फैल गई. विपक्षी पार्टियों, मुस्लिम संगठनों और कई बुद्धिजीवियों ने नीतीश कुमार के इस हरकत की निंदा की है. सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी तो नीतीश कुमार के बर्ताव के खिलाफ पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन कर रही है. इमारत शरिया ने तो नीतीश कुमार से माफी मांगने तक की मांग की है. लखनऊ और हैदराबाद में नितीश कुमार के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया जा चुका है. तमाम महिला नेता, अभिनेत्री और महिला अधिकार कार्यकर्ता नितीश कुमार के इस हरकत की खुलकर निंदा कर रहे हैं.
इन सबके बावजूद JD(U) पार्टी के कुछ मुस्लिम नेता नीतीश कुमार के बचाव में सामने आ गए हैं, लेकिन नितीश कुमार का समर्थन करने वाले JDU या अन्य दलों के नेता से लोग पूछ रहे हैं कि जिस डॉक्टर का हिजाब खींचा गया है, अगर उसकी जगह पर उनकी बहु- बेटियों को हिजाब या घूंघट खींचा गया होता तो क्या तब भी वो नितीश का समर्थन कर रहे होते? उधर इस घटना से आहत होकर डॉक्टर नुसरत ने सरकारी नौकरी को लात मारकर वापस बंगाल चली गयी है.
मुस्लिम बच्चियां आगे आ रही है
इस घटना के बारे में JDU नेता अफजल अंसारी ने नीतीश कुमार का बचाव करते हुए कहा, "यह सब देखने के नजरिए की बात है. CM नीतीश कुमार ने महिला के चेहरे से हिजाब इसलिए हटाया ताकि विज़ुअल्स अच्छे दिखें.नीतीश कुमार दिखाना चाहते थे कि मुस्लिम बच्चियां आगे आ रही है, और सरकारी जॉब कर रही है. किसी को इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए.विपक्ष के पास और कोई काम नहीं है.नीतीश कुमार सभी धर्मों का सम्मान करते हैं."
नीतीश के समर्थन में उतरे मुस्लिम मंत्री
JDU विधायक और मंत्री मोहम्मद जमा खान ने कहा, "आज कुछ नेताओं का स्तर बहुत गिर गया है. उन्हें यह भी समझ नहीं आता कि वे क्या कह रहे हैं. जिस व्यक्ति पर आरोप लग रहे हैं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उन्होंने बिहार में हर जाति, धर्म और समुदाय के लोगों के लिए काम किया है, और उनका सम्मान किया है. उनका चरित्र सब जानते हैं.
'बाप-बेटी जैसा स्नेह'
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार कभी लोगों को यह महसूस नहीं कराते कि वह मुख्यमंत्री हैं, बल्कि लोगों को ऐसा लगता है जैसे वह उनके अभिभावक हैं. विवाद पैदा करने वाली घटना में शामिल लड़की उनके लिए बेटी जैसी है. यह किसी तरह का दुर्व्यवहार नहीं है, बल्कि पिता-बेटी जैसा स्नेह है."
कौन है सरकारी मुसलमान
इस घटना को लेकर बिहार की सियासत पर बारीक नज़र रखने वाले सोशल एक्टिविस्ट अख्तर अली कहते हैं, "नीतीश कुमार के बचाव करने वाले नेता 'सरकारी मुसलमान' हैं. एक मुस्लिम लड़की का लाइव स्टेज पर हिजाब खींचना भावनात्मक लगाव का इजहार नहीं है, बल्कि उसकी प्राइवेसी और गरिमा का उल्लंघन है. इसे 'पिता-बेटी का प्यार' कहकर सही ठहराना न सिर्फ़ असंवेदनशील है, बल्कि महिलाओं के सम्मान और सुचिता का मज़ाक उड़ाना भी है. अगर यही हरकत किसी JDU नेता की बेटी या बहू के साथ की गई होती, तो क्या यही तर्क दिए जाते? क्या तब भी इसे प्यार कहा जाता? सच तो यह है कि महिलाओं का सम्मान कोई सापेक्ष अवधारणा नहीं है. यह हमेशा एक जैसा होता है, चाहे महिला किसी भी धर्म, जाति या समुदाय की हो.
हिजाब पर पहले से है विवाद
उन्होंने आगे कहा कि आज देश में हिजाब को लेकर माहौल पहले से ही ज़हरीला है.हिंदू संगठनों के विरोध प्रदर्शनों, धमकियों और सार्वजनिक अपमान के बीच, अगर किसी राज्य का मुखिया या उसके समर्थक ऐसे व्यवहार को कम करके आंकते हैं, तो यह आग में घी डालने जैसा है. यह न सिर्फ समाज को गलत संदेश देता है, बल्कि उन ताकतों को भी बढ़ावा देता है जो महिलाओं की धार्मिक पहचान को निशाना बनाती हैं.
'अगर किसी ने घूंघट खींच दिया होता तो'
सोशल मीडिया यूजर अंकित मिश्रा ने पूछा है कि अगर हरियाणा में किसी महिला का इस तरह घूंघट खींच दिया होता तो क्या आप तब भी कहते कि ये एक पिता जैसा प्यार है? घूंघट या पर्दा भारतीय नारी की पहचान है. ये उसके संस्कारों में शामिल हैं. देश में सांस्कृतिक भिन्नता है. उसका सभी को सम्मान करना चाहिए. नितीश कुमार का ये कृत्य निंदनीय है. इसका बचाव करने वाले लोग महिला विरोधी मानसिकता से ग्रस्त हैं.
यूजर्स ने लगा दी क्लास
निधि पाठक ने लिखा, नीतीश कुमार ने अपराध किया है, और जो लोग उनका बचाव कर रहे हैं, वो भी अपराधी हैं. अगर उनकी बेटी के साथ कोई अन्य नेता या अपरिचित पुरुष ऐसा करता, तो क्या वो उसका समर्थन कर रहे होते ? नितीश बिहार के मुख्यमंत्री हैं, इस आधार पर उनका गलत कृत्य का बचाव करना मूर्खता के अलावा कुछ नहीं है.