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Zee SalaamPhotosरहमत की रात, मगफिरत की सौगात; Shabe Barat पर इबादत में डूबा भारत
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रहमत की रात, मगफिरत की सौगात; Shabe Barat पर इबादत में डूबा भारत

Shabe Barat 2026: शब-ए-बारात के मुबारक मौके पर भारतभर में मुसलमानों ने इबादत, तौबा, इस्तिगफार और दुआओं के साथ यह रात अकीदत से मनाई. मस्जिदों में नमाज, कुरआन की तिलावत, दीनी जलसे, सामूहिक दुआएं और लंगर के जरिए रहमत और मगफिरत की दुआ की गई.

 

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शब-ए-बारात के मुबारक मौके पर पूरे भारत में मुसलमानों ने इबादत, तौबा, इस्तिगफार और दुआओं के साथ यह रात अकीदत और एहतराम से मनाई. इसी क्रम में मंगलवार (3 फरवरी 2026) नमाज-ए-इशा के बाद भारत के अलग-अलग मस्जिद में भव्य, अनुशासित और रूहानी तरबियती इज्तिमा का आयोजन किया गया. 

 

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शब-ए-बारात के मौके बड़ी संख्या में मस्जिदों और रौजे में अकीदतमंदों पहुंचकर दुआ की. साथ ही मस्जिदों में आयोजित पाक मजलिसों शिरकत कर शब-ए-बारात की फजीलतों से रूबरू होने के साथ-साथ अल्लाह की बारगाह में मगफिरत और निजात की दुआएं मांगीं. इस दौरान महाराष्ट्र के कोटरगेट समेत कई जगहों पर खास दीनी कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक से हुई.

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उलेमा ने अपने खिताब में उन्होंने कुरआन और हदीस की रोशनी में शब-ए-बारात की अहमियत और फजीलतों पर विस्तार से रौशनी डाली. उन्होंने हजरत मुआज बिन जबल रजियल्लाहु अन्हु की रिवायत बयान करते हुए कहा कि नबी (स.अ.) ने फरमाया, "अल्लाह तआला 15वीं शाबान की रात अपनी मखलूक की तरफ खास नजर-ए-रहमत फरमाता है और सबको बख्श देता है, सिवाय मुशरिक और कीना (द्वेष) रखने वाले को छोड़कर."

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पूरे भारत में शबे-बारात का त्योहार पूरे जोशो-खरोश और अकीदत के साथ मनाया गया. इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक शाबान माह की 15वीं रात को मनाई जाने वाली शबे-बारात को रहमत, मगफिरत और निजात की रात माना जाता है. देश के अलग-अलग हिस्सों में मुस्लिम समुदाय इबादत, तौबा, जिक्र और दुआओं के जरिए इस रात को गुजार रहा है. मस्जिदों में देर रात तक नमाज़, क़ुरआन की तिलावत और धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी है.

 

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शबे-बारात को लेकर इस्लामी मान्यता है कि इस रात अल्लाह तआला अपने बंदों की ओर खास रहमत की नजर फरमाता है और तौबा व इस्तिगफार करने वालों के गुनाह माफ करता है. इसी वजह से यह रात मुसलमानों के लिए बेहद अहम मानी जाती है. भारत के कई शहरों और कस्बों में मस्जिदों में विशेष धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं, जहां उलेमा-ए-किराम कुरआन और हदीस की रौशनी में शबे-बारात की अहमियत पर बयान कर रहे हैं.

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नमाज-ए-इशा के बाद कई मस्जिदों में धार्मिक जलसे और तरबियती इज्तिमाओं का आयोजन किया जा रहा है. इन कार्यक्रमों की शुरुआत तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक से की जा रही है, जिसके बाद नात-ए-रसूल (स.अ.) पेश की जा रही है. उलेमा अपने खिताब में तौबा, इखलास, सब्र और नेक अमल की अहमियत पर जोर दे रहे हैं. साथ ही लोगों को आपसी नफरत और दिलों में कीना रखने से बचने की नसीहत भी की जा रही है.

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इस मौके पर दुआओं का विशेष इंतजाम किया गया है. नमाज और जिक्र के बाद सामूहिक दुआ कराई जा रही है, जिसमें लोग अपने गुनाहों की माफी, परिवार की सलामती, समाज में अमन-ओ-चैन और देश की भलाई के लिए दुआ कर रहे हैं. कई जगहों पर जिक्र-ए-इलाही और दरूद-ओ-सलाम की महफ़िलें भी जारी हैं, जिनमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हो रहे हैं.

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शबे-बारात के दौरान कुछ इलाकों में मस्जिदों और धार्मिक संस्थाओं की ओर से नियाज़ और लंगर का भी इंतज़ाम किया गया है. इसमें स्थानीय लोगों के साथ-साथ जरूरतमंदों को भी शामिल किया जा रहा है. मुस्लिम समुदाय के लोग कई जगहों पर गरीबों में खाने-पीने की चीजें, गर्म कपड़े और दूसरी जरुरत की चीजें बांटते नजर आए. मस्जिद कमेटियां और स्वयंसेवक कार्यक्रमों की व्यवस्था संभालते हुए यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आयोजन शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से संपन्न हों.

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कुल मिलाकर, शबे-बारात भारत में पूरे अकीदत और मजहबी रिवायत के मनाई जा रही है और अभी भी इबादतों का सिलसिला जारी है. यह रात मुसलमानों के लिए आत्ममंथन, तौबा और अल्लाह से करीबी बढ़ाने का मौका मानी जाती है. इबादत, दुआ और जिक्र के जरिए लोग न सिर्फ अपनी रूहानी जिंदगी को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि समाज में भाईचारे, सब्र और इंसानियत के संदेश को भी आगे बढ़ा रहे हैं.