Muslim Men Lungi Tradition: भारत समेत दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में लुंगी को पारंपरिक और आरामदायक परिधान के तौर पर पहना जाता है. खासकर मुस्लिम समुदाय में लुंगी का चलन न सिर्फ सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा है, बल्कि धार्मिक सोच और सादगी की मिसाल भी है. मस्जिद में नमाज अदा करनी हो या रोजमर्रा की जिंदगी में आराम की चाहत, लुंगी कई मुस्लिम मर्दों की पहली पसंद बनी हुई है. धार्मिक, सामाजिक और भौगोलिक वजहों ने इसे एक मजबूत पहचान दी है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि लुंगी का इस्लाम से क्या कनेक्शन है. आइए जानते हैं.
1/8इस्लाम में सादगी और शालीनता को अहम माना जाता है. लुंगी एक सादा और ढीला कपड़ा है, जिसे शरीर को ढकने के मामले में शरिया के नियमों के करीब माना जाता है.
2/8कई मुस्लिम मर्द खासकर नमाज के दौरान लुंगी पहनना पसंद करते हैं क्योंकि यह कपड़ा हल्का होता है, साफ रखने में आसान होता है और इबादत के दौरान आराम देता है.
3/8इस्लामी इतिहास में कई हदीसों में इस बात का जिक्र है कि पैगंबर मुहम्मद (SAW) ने सादा और ढीला कपड़ा पहना था. इससे प्रेरित होकर कुछ मुसलमान लुंगी या इसी तरह के कपड़े पहनते हैं.
4/8देश के कई मदरसों और मस्जिदों में मौलवी, हाफिज और छात्र लुंगी पहने नजर आते हैं, खासकर दक्षिण और पूर्वी भारत में। यह धार्मिक माहौल से मेल खाता है.
5/8तमिलनाडु, केरल, बंगाल और ओडिशा के मुस्लिम समुदायों में लुंगी पहनना न केवल एक जरूरत बन गया है, बल्कि पहचान और विरासत का प्रतीक भी बन गया है.
6/8मुस्लिम समुदाय में सफेद रंग को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है. इसलिए त्योहारों, शुक्रवार की नमाज या ईद पर सफेद लुंगी पहनना सम्मानजनक माना जाता है.
7/8हज और उमराह के दौरान पुरुषों को "एहराम" पहनना होता है, जो दो सफेद बिना सिले कपड़ों से बना होता है. एक कमर के नीचे और दूसरा कंधे पर. यह परंपरा भी लुंगी जैसी ही है.
8/8मुस्लिम समुदाय के कई वर्गों में लुंगी एक सस्ता, टिकाऊ और बहुउद्देश्यीय परिधान है. इसमें कोई दिखावा नहीं होता, जो इस्लामी सोच से मेल खाता है.