Zohra Sehgal's Death Anniversary: 102 वर्ष की उम्र में दुनिया से विदा लेने वाली जोहरा सहगल न सिर्फ एक बेहतरीन अभिनेत्री थीं, बल्कि उन्होंने समाज की रूढ़ियों को तोड़कर साहस, जुनून और जिद से अपनी अलग पहचान बनाई.
1/8भारतीय रंगमंच और फिल्मों की दुनिया में जोहरा सहगल एक ऐसा नाम हैं, जो न सिर्फ अपनी अदाकारी के लिए जानी जाती हैं बल्कि अपनी जिद, साहस और रुढ़ीवादी सामाजिक बंधनों को तोड़ने वाली सोच के लिए भी याद की जाती हैं. 10 जुलाई 2014 को 102 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाली जोहरा सहगल की जिंदगी जद्दोजहद, साहसिक फैसलों और जुनून की मिसाल है.
2/8जोहरा सहगल का जन्म 27 अप्रैल 1912 को उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था. उनका पूरा नाम 'साहिबजादी जोहरा मुमताज उल्लाह खान बेगम' था. उन्होंने अपना बचपन पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के चकराता में बिताया. बहुत छोटी उम्र में ही उनकी मां का साया सिर से उठ गया था, लेकिन मां की कमी को उन्होंने कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया.
3/8जोहरा बचपन से ही अलग सोच रखती थीं. उस दौर में जब लड़कियों की पढ़ाई बीच में छुड़ाकर जल्दी शादी कर दी जाती थी. उन्होंने इस परंपरा के खिलाफ आवाज उठाई. उनके परिवार वाले भी चाहते थे कि वह जल्दी शादी कर लें, लेकिन जोहरा की ख्वाहिश कुछ और थी. पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्होंने जानबूझकर 10वीं की परीक्षा में तीन बार फेल होना चुना. यह कदम उन्होंने इसलिए उठाया ताकि उनकी शादी टल जाए और वह आगे की पढ़ाई कर सकें.
4/8इसके बाद उन्होंने लाहौर के क्वीन मैरी कॉलेज से पढ़ाई की, जो उस समय एक प्रतिष्ठित संस्थान था. पढ़ाई पूरी करने के बाद 1930 में जोहरा सहगल यूरोप चली गईं. वहां उन्होंने जर्मनी के ड्रेसडेन में मशहूर बैले डांसर मेरी विगमैन के स्कूल में तीन साल तक मॉडर्न डांस की पढ़ाई की.
5/8भारत लौटने के बाद 1935 में उन्होंने महान नृत्य निर्देशक उदय शंकर के डांस ग्रुप में शामिल होकर अपना करियर शुरू किया. इस दौरान उन्होंने जापान, मिस्र, यूरोप और अमेरिका में अपनी प्रस्तुति दी. इसी दौरान उनकी मुलाकात कामेश्वर सहगल से हुई, जो उनसे उम्र में आठ साल छोटे थे और एक अलग धर्म से ताल्लुक रखते थे, लेकिन इन बातों की परवाह किए बिना जोहरा ने उनसे शादी कर ली.
6/8इस शादी से उनका परिवार के लोग काफी नाराज हुए, लेकिन जोहरा ने अपने फैसले पर अडिग रहकर दिखा दिया कि वह अपने जिंदगी के फैसले खुद ले सकती हैं. शादी के बाद वह लाहौर गईं, जहां उन्होंने 'जोहरा डांस इंस्टिट्यूट' नाम से एक अकादमी शुरू की. 1947 में देश के विभाजन के बाद हुए दंगों की वजह से उन्हें अपने पति और एक साल की बच्ची के साथ लाहौर छोड़कर मुंबई आना पड़ा. यहां उन्होंने एक बार फिर से खुद को स्थापित किया. उन्होंने पृथ्वी थिएटर से जुड़कर रंगमंच में सक्रियता दिखाई और फिर फिल्मों की ओर रुख किया.
7/8उनकी पहली फिल्म 'धरती के लाल' 1946 में आई थी. इसके बाद चेतन आनंद की फिल्म 'नीचा नगर' में उनके एक्टिंग को खूब तारीफें मिलीं. यह फिल्म कान फिल्म फेस्टिवल में भी सम्मानित हुई थी. जोहरा सहगल ने एक्टिंग के साथ-साथ कोरियोग्राफी में भी हाथ आजमाया. उन्होंने राज कपूर की 'आवारा' और गुरुदत्त की 'बाजी' जैसी फिल्मों में कोरियोग्राफी की. उनका फिल्मी करियर सात दशकों से भी लंबा रहा. 'दिल से', 'हम दिल दे चुके सनम', 'कभी खुशी कभी गम', 'वीर-जारा' और '' जैसी फिल्मों में उन्होंने यादगार भूमिकाएं निभाईं.
8/8साल 2007 में आई फिल्म 'सांवरिया' उनकी आखिरी फिल्म रही. अपनी कला के लिए उन्हें कई बड़े सम्मान मिले. इसमें देश के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में शामिल पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण शामिल हैं. उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी नवाजा गया. जोहरा सहगल ने अपने जिंदगी जीने के तरीक से यह साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बंदिश आपको रोक नहीं सकती. उन्होंने समाज की रूढ़ियों को तोड़ा, नई राहें चुनीं और एक प्रेरणादायक जिंदगी को जिया. आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए यही कहा जा सकता है, जोहरा सिर्फ एक कलाकार नहीं, एक क्रांतिकारी सोच का नाम थीं.