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Syria News Today: अपने समृद्ध इतिहास के लिए मशहूर सीरिया लंबे समय तक गृहयुद्ध में आग में जलता रहा है. हालांकि, बीते साल राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार का तख्ता पलट के बाद नई सरकार ने शांति व्यवस्था कायम करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं. वर्तमान में अमेरिका इजराइल के साजिशों का शिकार नव गठित सीरियन सरकार वहां की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बड़ा फैसला किया है.
इसके तहत राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की अगुवाई में बढ़ती महंगाई और गिरी हुई मुद्रा के बीच शामी पाउंड से दो जीरो हटाकर नए नोट लाने का फैसला किया है. यह फैसला सिर्फ आर्थिक सुधार नहीं बल्कि आम जनता में भरोसा वापस लाने की कोशिश भी है. अर्थशास्त्रियों ने अहमद अल-शरा सरकार के इस फैसले पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है.
दरअसल, सीरिया में 14 साल के लंबे गृहयुद्ध और राष्ट्रपति बशर अल-असद के पद छोड़ने के बाद बनी नई सरकार ने देश की चरमराती अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया है. अब सीरिया की मुद्रा यानी शामी पाउंड से दो जीरो हटाकर नए नोट जारी किए जाएंगे.
न्यूज एजेंसी रायटर्स के मुताबिक, गृहयुद्ध के चलते शामी पाउंड की कीमत लगभग 99 फीसदी तक गिर चुकी है. जहां पहले एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 50 शामी पाउंड हुआ करती थी. वहीं, अब डॉलर करीब 10,000 शामी पाउंड का हो चुका है. इतनी बड़ी गिरावट ने आम सीरियाई लोगों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है.
सीरिया के केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दुल कादिर हसरीया ने सऊदी अरब के सरकारी चैनल अल-अरबिया को दिए इंटरव्यू में बताया कि यह बदलाव समय की मांग है. उन्होंने कहा कि "हमने नई मुद्रा के लिए सरकारी, निजी और फाइनेंनशियल एक्सपर्ट की कमेटियां बनाई हैं जो इस फैसले की जरूरतों और प्रक्रियाओं पर काम कर रही हैं."
गवर्नर अब्दुल कादिर हसरीया के मुताबिक, नई मुद्रा लाने की समय-सीमा फिलहाल तय नहीं की गई है, लेकिन यह जरूर कहा गया है कि प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. सरकार का मानना है कि इससे जनता का भरोसा फिर से शामी पाउंड पर बहाल होगा और देश की आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे स्थिर होगी और महंगाई को कम करने में मदद मिलेगी.
गौरतलब है कि 2011 में शुरू हुए गृहयुद्ध के बाद से सीरिया की मुद्रा को गहरा झटका लगा है. यहां महंगाई चरम पर है, मुद्रा की वैल्यू लगभग खत्म हो चुकी है और लेन-देन करना बेहद मुश्किल हो गया है. इस फैसले को एक्सपर्ट आर्थिक स्थिरता की दिशा में पहला सकारात्मक कदम मान रहे हैं. लेकिन इसके लिए असली चुनौती होगी, इसे जमीन पर लागू करना और जनता में विश्वास पैदा करना.