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Punjab Floods 2025: पंजाब में भारी बारिश के कारण भयंकर बाढ़ आई है. यह बाढ़ 1988 के बाद से सबसे भीषण है. अब तक करीब 50 लोगों की मौत हो गई है और 1.75 लाख हेक्टेयर से ज्यादा फसलें नष्ट हो गई हैं. केंद्र और राज्य सरकारों की राहत सामग्री पहुंचाने में शुरुआती धीमी रफ्तार पंजाब को अलग-अलग जगहों से मदद मिलनी शुरू हो गई. सिख गैर-सरकारी संगठनों, युवाओं, किसानों, पंजाबी कलाकारों और देशभर के कई समूहों ने तेजी से राहत कार्य शुरू किया.
इस मुसीबत के वक्त पंजाब और दूसरे राज्यों के मुस्लिम संगठनों ने भी आगे आकर मदद की. हरियाणा के मेवात क्षेत्र के मुसलमानों ने राहत सामग्री जुटाने के लिए घर-घर अभियान चलाया. यहां से ट्रकों में राशन, कपड़े, मच्छरदानी, दवाइयां, पीने का साफ पानी और पशुओं के लिए चारा तक भेजा गया.
मेवात के लोगों ने बाढ़ पीड़ितों की मदद की
हरियाणा के मेवात के शिकारवा गांव की फ्रेटरनिटी मूवमेंट इकाई से जुड़े 31 साल के शाहरुख खान ने फिरोज़पुर, लुधियाना और गुरदासपुर जैसे प्रभावित जिलों में राहत सामग्री पहुंचाने का समन्वय किया. उनका कहना है, “मेवात से पंजाब को काफी मदद भेजी जा रही है. पूरा इलाका इसमें जुटा हुआ है.” मेवात से सबसे भावुक कहानी भी सामने आई थी. मेवात के तिलकपुरी गांव की 80 साल की रहीमी ने चांदी की चूड़ियां और अपने अंतिम दिनों के लिए बचाकर रखी कुछ बचत दान कर दी.
उत्तर प्रदेश के मुसलमानों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
इसी तरह, उत्तर प्रदेश के मुसलमानों ने भी बाढ़ पीड़ितों की मदद की है. शामली ज़िले के कस्बे के मुसलमानों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और बाढ़ पीड़ितों की मदद की. यह मदद मुस्लिम संगठन मुस्लिम जाट फ़ाउंडेशन (MJF) के आह्वान पर की गई. 25 अगस्त को बाढ़ की खबर मिलते ही उन्होंने मदद का फैसला लिया. फारुक अमृतसर और गुरदासपुर जाकर स्थिति का आकलन कर चुके हैं. उन्होंने बताया, “बॉर्डर के इलाके बुरी तरह प्रभावित हैं. गग्गो महल, सुल्तान महल, कल्लो महल और डेरा बाबा नानक जैसे गांवों में हमने राहत सामग्री बांटी.”
सिख समुदाय के लोगों ने मुसलमानों पर किया था उपकार
गौरतलब है कि साल 2019 में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए CAA-NRC कानून के खिलाफ देशभर में मुसलमानों ने विरोध प्रदर्शन किए थे. उस समय सिख समुदाय ने खुलकर मुसलमानों का साथ दिया और जगह-जगह लंगर लगाकर भोजन, पानी और राहत उपलब्ध कराई. इस एकजुटता ने दोनों समुदायों के बीच भरोसे और भाईचारे को मजबूत किया. यही कारण है कि आज जब पंजाब बाढ़ जैसी भीषण आपदा झेल रहा है, तो मुसलमान समुदाय भी सिख भाइयों की मदद के लिए आगे आ रहा है.