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Rajasthan News: राजस्थान विधानसभा ने मंगलवार को धर्मांतरण रोकने के लिए सख्त प्रावधानों वाला राजस्थान अवैध धर्मांतरण निषेध बिल, 2025 पारित कर दिया. इस कानून के तहत जबरन, धोखे से, प्रलोभन देकर या दबाव डालकर कराए गए धर्मांतरण को अपराध माना जाएगा. दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा, भारी जुर्माना और आजीवन कारावास तक का प्रावधान है. हालांकि, अपने पैतृक धर्म में वापसी करने वालों को इस कानून से छूट दी गई है.
विपक्षी कांग्रेस विधायकों ने विधेयक पर चर्चा का बहिष्कार किया और सदन से वॉकआउट कर दिया. कांग्रेस का आरोप है कि यह कानून समाज में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ेगा और तनाव पैदा करेगा. इसी साल फरवरी में इसी तरह का एक बिल सदन में पेश किया गया था, जिसे बाद में वापस लेकर नया बिल लाया गया,
- दोषियों को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है.
- एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
- जहां सामूहिक धर्मांतरण होगा, वहां की संपत्ति जब्त कर उसे ध्वस्त किया जा सकेगा.
- लगाए गए जुर्माने की राशि पीड़ितों को दी जाएगी, इसके अलावा अदालत के जरिए तय मुआवजा भी देना होगा.
- जिन शादियों का मकसद केवल धर्मांतरण होगा, उन्हें अदालत के जरिए अमान्य घोषित किया जाएगा. ऐसे विवाह से पहले या बाद में किया गया धर्मांतरण अवैध माना जाएगा.
- अपराध गिरफ्तारी योग्य (cognisable), गैर-जमानती (non-bailable) और सेशन कोर्ट (sessions court) में सुनवाई योग्य होगा.
साल 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी ऐसा कानून लाने की कोशिश की थी, लेकिन उस वक्त की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कांग्रेस, मानवाधिकार ग्रुप और अल्पसंख्यक संगठनों के विरोध की वजह से बिल को लौटा दिया था. 2008 में संशोधित बिल केंद्र सरकार के पास लंबित रह गया था. 2017 में राजस्थान हाईकोर्ट ने जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे. इसमें कहा गया था कि केवल नौजवान ही धर्म परिवर्तन कर सकते हैं और इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देना और सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा करना जरूरी होगा.
गृह राज्य मंत्री (MoS) जवाहर सिंह बेधम ने विधानसभा में कहा कि इस विधेयक के पारित होने से समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखने का रास्ता खुलेगा. उन्होंने कहा कि हमारा सनातन धर्म हमेशा उदार रहा है, जिसका प्रतिबिंब संविधान के अनुच्छेद 25 में भी दिखता है. लेकिन धोखे, डर और छल से कराया गया धर्म परिवर्तन किसी भी तौर पर कबूल नहीं है.