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Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने मीट व्यापारियों को लाइसेंस देने में देरी करने के मामले में सुनवाई की है. इस दौरान हाई कोर्ट ने सख्त रूप अपनाते हुए संबंधित विभागों से चार हफ्ते के भीतर लिखित जवाब देने का आदेश दिया है. इससे पहले हाई कोर्ट ने संबंधित विभागों को मीट व्यापारियों पर कठोर कार्रवाई से बचने और लाइसेंस देने का आदेश दिया था.
दरअसल, मीट के बहाने मुसलमानों को टार्गेट करने की राजनीति बहुत पुरानी है. इस चीज के लिए कई बार भीड़ के जरिए हिंसा का सहाराय लिया जाता है, तो कई बार कानूनी दांव-पेंच का सहारा लिया जाता है. हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद संबंधित विभागों की ओर से मीट कारोबारियों को लाइसेंस देने में देरी की गई, जिसके बाद राजस्थान के कोटा के 10 मीट व्यापारियों ने हाई कोर्ट में रिट दाखिल कर दी.
लाइसेंस जारी नहीं करने के मामले में हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है और संबंधित विभागों से लिखित जवाब मांगा है. याचिकाकार्ताओं की ओर से हाई कोर्ट में वरिष्ठ वकील अंसार इंदौरी और अजीत कसवा पेश हुए. इस मामले पर राजस्थान हाई कोर्ट के जज जस्टिस अनूप ढंढ ने सुनवाई की.
बता दें कि तीन महीने पहले कोटा नगर निगम ने मीट व्यापारियों को नोटिस दिया था, और जिन मीट व्यापारियों और दुकानदारों के पास लाइसेंस नहीं थे. उन पर नगर निगम ने कार्रवाई करते हुए दुकानों को बंद करवा दिया था. वहीं, इस कार्रवाई से पीड़ित 25 मीट व्यापारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने नगर निगम को मीट व्यापारियों पर कठोर कार्रवाई न करने और लाइसेंस जारी करने का आदेश दिया था.
हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक मीट कारोबारियों ने संबंधित विभाग में लाइसेंस के लिए आवेदन दिया, लेकिन विभाग की तरफ से कोई सुनवाई नहीं हुई, जिसके बाद पीड़ित मीट कारोबारियों ने एक बार फिर से हाई कोर्ट का रुख किया है.
गौरतलब है कि मीट कारोबार और मांसाहार पर भारत में जमकर राजनीति होती है. भारत की अकसरियत आबादी मांसाहारी है. जब मांसाहार के बहाने राजनीति होती है और मांस की दुकानों को कानूनी दांव-पेंच का इस्तेमाल कर बंद करवाने की कोशिश की जाती है, तो इससे छोटे मांस कारोबारियों पर काफी नुकसान पहुंचता है.