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Uttar Pradesh News Today: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (15 सितंबर) वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 पर दिए गए अंतरिम फैसले से एक बार फिर इंसाफ और संविधान की रक्षा का उदाहरण पेश किया है. अदालत ने साफ कहा कि संविधान और कानून का पालन करना हर नागरिक और संगठन की जिम्मेदारी है. यह आदेश देशभर में भेदभाव वाली सियासत के बीच एक राहत की खबर की तरह देखा जा रहा है.
वक्फ (संशोधन) अधिनियम पर अंतरिम रोक के फैसले के बाद देशभर से मुस्लिम समुदाय के साथ अन्य लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. इस बीच समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने सुप्रीम कोर्ट के वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 पर दिए गए अंतरिम फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि ये फैसला भेदभावपूर्ण राजनीति के बीच एक सकारात्मक बदलाव की तरह है.
इस मौके पर सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तुलना मौसम से की. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, "कोर्ट ने जिन बिंदुओं पर फैसला सुनाया है, वह बिल्कुल मई और जून में चलने वाली गर्म हवाओं की तरह हैं, जिस पर भेदभाव की सियासत हो रही थी. हालांकि, इसके बाद बारिश हो जाती है और अचानक ठंडी हवाएं चलने लगती हैं, इसी तरह ही सुप्रीम कोर्ट ने राहत भरी खबर दी है।"
मोहिबुल्लाह नदवी ने आगे कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून के कुछ विवादास्पद प्रावधानों पर रोक लगाकर राहत भरी खबर दी है, जो भेदभावपूर्ण सियासत के बीच एक पॉजिटिव बदलाव की तरह है." नदवी ने फैसले के तीन प्रमुख बिंदुओं का जिक्र करते हुए कहा कि जिन चीजों पर रोक लगाई गई है, उससे इन चीजों को बेहतर करने में मदद मिलेगी. इससे वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार होगा और संविधान के मूल सिद्धांतों का सम्मान होगा.
रामपुर सांसद ने आगे कहा, "जिस तरह से सरकार ने एक कानून लाकर उसे पास किया, हम लोग उसी के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे थे. आज सुप्रीम कोर्ट ने उन्हीं बिंदुओं पर रोक लगाने का काम किया है, जिससे संविधान की रूह कमजोर हो रही थी."
सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने हालिया दिनों राष्ट्रीय स्वंय सेवक (RSS) संघ के प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान को लेकर भी प्रतिक्रिया व्यक्त की. मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा, "अगर सच्चे मन और पूरे अकीदे से वो यह बात कह रहे हैं तो पहले उन्हें यह देखना चाहिए कि उनके संगठन के तहत चलने वाले लोग नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं. उन्हें पहले अपने यहां से इसकी शुरुआत करनी चाहिए. हम अपने सभी भाइयों को साथ तभी ले सकते हैं, जब हमारा मन बड़ा हो." उन्होंने मोहन भागवत नसीहत देते हुए कहा, "सभी मजहबों को सम्मान देकर इसकी शुरुआत नागपुर से करनी चाहिए."