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Rampur Waqf dispute: सरकार की तरफ से वक्फ बोर्ड के सभी संपत्तियों को आगामी 5 दिसंबर तक उम्मीद पोर्टल पर रजिस्टर्ड करने का निर्देश दिया गया है. इन सब के बीच रामपुर जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है. यहां की लगभग सभी पुराने कब्रिस्तान, वक्फ बोर्ड में रजिस्टर्ड होने के बावजूद, सर्वे की रिकॉर्ड में ये जमीन सरकार की जमीन दिखाई जा रही है. इस घटना ने मुस्लिम समाज में लोगों की चिंताए बढ़ा दी है. लोगों को डर है कि सरकार इन कब्रिस्तान की जमीनों पर भविष्य में अपना दावा करके छिन सकती है.
दरअसल, रामपुर के नवाबों ने मुस्लिम समाज की जरूरतों को देखते हुए मस्जिदों और कब्रिस्तानों के लिए जमीन दान दी थी. लेकिन आजादी के बाद जब रामपुर का भारत में विलय हुआ, उस समय इन धार्मिक जगहों को सरकारी मालिकाना हक से छूट देने का कोई इंतजाम नहीं किया गया.
वक्फ डिपार्टमेंट के रिटायर्ड इंस्पेक्टर नोमान जलीस ने बताया कि उम्मीद पोर्टल पर लोड बढ़ने या टेक्निकल दिक्कतों की वजह से डॉक्यूमेंट अपलोड नहीं हो पा रहे हैं. उन्होंने बताया कि जामा मस्जिद में 40 प्रॉपर्टी अपलोड होनी थीं, लेकिन पूरी रात कोशिश करने के बाद सुबह ही अपलोड हो पाई.
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक रामपुर में वक्फ बोर्ड के पास टोटल 3012 वक्फ प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड हैं, लेकिन सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से 2363 प्रॉपर्टी सरकारी जमीन (नुजुल) पर हैं. अगर यही हाल रहा, तो ज़िले में मुसलमान सिर्फ 649 प्रॉपर्टीज के असली मालिक माने जाएंगे, जबकि बाकी पर सरकार मालिकाना हक का दावा कर सकती है. इस स्थिति ने ज़िले के मुसलमानों में गहरी चिंता पैदा कर दी है, खासकर इस बात को लेकर कि पोर्टल की धीमी स्पीड की वजह से रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पर भी असर पड़ रहा है.