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RJD Muslim Candidate 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तस्वीर बिल्कुल साफ हो गई है और सभी राजनीतिक दलों के नेता चुनावी मैदान में कूद पड़े हैं. इस बार सत्ता पक्ष और विपक्ष में सीधा मुकाबला है, लेकिन प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज भी कुछ सीटों पर दोनों गठबंधनों को चुनौती दे रही है. इस बीच राजद और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के समाजिक न्याय के दावों की पोल खुल गई है. चुनाव से पहले राजद और तेजस्वी यादव लगातार सामाजिक न्याय का नारा लगा रहे थे, 'जिसकी जितनी भागेदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी', जब टिकट देने की बारी आई तो सारे वादे और दावे हवा हो गए.
दरअसल, राजद ने पूरे बिहार में 143 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं. इनमें से 51 उम्मीदवार यादव समुदाय से, 19 मुस्लिम बिरादरी से हैं और बाकी सामान्य वर्ग और दूसरे जातियों से हैं. बिहार में यादव आबादी कुल राज्य की लगभग 14.26 फीसद है. आरजेडी ने इसका उपयोग करने में कोई कमी नहीं छोड़ी. 143 सीटों में से 51 उम्मीदवार यादव हैं. यानी लगभग 36 फीसद टिकट यादवों को ही दे दिए गए हैं.
तेजस्वी ने किया मुसमलानों के साथ धोखा?
इस बीच, बिहार की मुस्लिम आबादी लगभग 18 फीसद है, फिर भी राजद ने मुस्लिम समुदाय से सिर्फ 19 उम्मीदवार ही उतारे हैं. इसका मतलब है कि कुल उम्मीदवारों में मुस्लिमों की हिस्सेदारी लगभग 13 फीसद ही रही है. इससे साफ जाहिर होता है कि 'जितनी भागीदारी, उतनी हिस्सेदारी' का कथित 'MY' समीकरण, सिर्फ़ एक दिखावा और खोखला सा लगता है.
MY समीकरण का खोखलापन
राजद के 'MY' समीकरण को हमेशा वोट बैंक के नज़रिए से देखा जाता रहा है. इसका मतलब है यादव और मुस्लिम वोटों का संतुलित वितरण. हालांकि, 143 उम्मीदवारों में यादव उम्मीदवारों की संख्या मुस्लिम उम्मीदवारों से लगभग तीन गुना ज़्यादा है. MY समीकरण का खोखलापन न सिर्फ संख्याओं में, बल्कि उसके राजनीतिक रुख और रणनीति में भी साफ है. तेजस्वी यादव के नेतृत्व में पार्टी लगातार दावा करती रही है कि 'जिसकी जितनी भागेदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी' के सिद्धांत को लागू किया जाएगा. हालांकि, जमीनी तस्वीर अलग है.
मुसलमानों के साथ धोखा
बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले पत्रकार शम्स अजीज का कहना है कि मुसलमान वोट सबको चाहिए, लेकिन मुसलमान किसी को नहीं चाहिए. आरजेडी हमेशा मुसलमानों के साथ धोखा करती रही है और इस चुनाव ने यही साबित किया. तेजस्वी यादव का समाजिक न्याय का बयान सिर्फ खोखला वादा साबित हुआ. बिहार में यादवों की आबादी केवल 14 फीसदी है, लेकिन 143 सीटों में 51 यादव उम्मीदवार हैं. जबकि मुस्लिम आबादी करीब 18 फीसदी होने के बावजूद सिर्फ 19 उम्मीदवारों को ही टिकट दी गई. यह साफ संकेत है कि MY समीकरण असंतुलित और दिखावटी है.
जानें राजद के मुस्लिम उम्मीदवार कहां-कहां से लड़ रहे हैं चुनाव
RJD ने पुराने और नए मुस्लिम नेताओं को चुनावी मैदान में उतारा है. केवटी विधानसभा सीट से डॉ. फिरोज फातमी, सिमरी बख्तियारपुर से यूसुफ सल्लाउद्दीन, समस्तीपुर विधानसभा सीट से अख्तरुल इस्लाम शहीन, ढाका से फैसल रहमान को टिकट दिया है. वहीं, सुरसंड से सैयद अबु दोजाना, सीवान के सबसे चर्चित विधानसभा सीट रघुनाथपुर से ओसामा शाहाब और प्राणपुर से इशरत परवीन को चुनावी मैदान में उतारा है. साथ ही, पार्टी ने ठाकुरगंज से सऊद आलम और कोचाधाम से मुजाहिद आलम को टिकट दिया है. पार्टी के प्रमुख मुस्लिम नेता अब्दुलबारी सिद्दीकी भी चुनाव लड़ रहे हैं.