Waqf Amendment Bill in Rajya Sabha: लोकसभा में देर रात वक्फ संशोधन विधेयक पारित होने के बाद अब यह संसद के ऊपरी सदन में पहुंच चुका है. राज्यसभा में इस बिल को लेकर पक्ष और विपक्ष गहमा गहमी चल रही है. RJD सांसद मनोज झा ने बिल पर अपने बयान में केंद्र पर जमकर जुबानी हमला बोला.
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Manoj Jha on Waqf Amendment Bill: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने गुरुवार (3 अप्रैल) को राज्यसभा में कहा कि गाहे-बगाहे किसी पुरानी मस्जिद के नीचे कुछ चीजें ढूंढी जा रही हैं. इस तरह के माहौल में वक्फ संशोधन विधेयक लाने से सरकार की नीयत पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
विधेयक पर सदन में जारी चर्चा के दौरान मनोज झा ने कहा, "देश का माहौल कैसा है, इस पर एक नजर डालिए. कभी आर्थिक बहिष्कार की बात की जाती है, पूजा स्थल अधिनियम पर सवाल उठाया जाता है. इस तरह के माहौल में आपके विधेयक के मसौदे और नीयत दोनों पर सवालिया निशान लग जाता है." उन्होंने कहा कि कई बार लगता है कि "यह विधेयक बुलडोजर के लिए एक कानूनी कवर" है.
RJD सांसद मनोज झा ने सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, "आप लोग अक्सर सोचते हैं कि बहुत बड़ा बहुमत है तो सारा 'विजडम' आप ही के पास है." उन्होंने सवाल किया कि खानपान, वस्त्र, आभूषण, भाषा और इबादत पर इतनी तकरार क्यों? हमें जनता को हाशिए पर छोड़ने की आदत बन गई है. हम लगातार लोगों को हाशिए पर छोड़ रहे हैं.
सांसद मनोज झा ने आगे कहा, "इस देश के हिंदुओं को मुसलमानों की आदत है और मुसलमानों को हिंदुओं की आदत है." उन्होंने कहा, "ईसाइयों-सिखों को हिंदुओं और मुसलमानों की आदत है. ये आदतें मत बदलवाइए. जमीन के साथ किसी व्यक्ति और कौम का क्या रिश्ता होता है, इसको भी समझने की जरूरत है."
मनोज झा ने कहा कि इस देश में इतना सेक्यूलर मिजाज कर दीजिए कि हर धर्म की संस्थाओं में दूसरे धर्म के लोगों को जगह मिले या फिर यह तय कर लिया गया है कि सारा संयोग और सारा प्रयोग मुसलमानों को लेकर ही होगा. उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय की एक स्मृति होती है. कोई मस्जिद कब से इस्तेमाल में है, आप उसके दस्तावेज ढूंढेंगे. अगर कोई पुरानी संपत्ति है, कहां से दस्तावेज लाएं, सब विवाद में आ जाएंगे. अदालत में अपीलों का एक पहाड़ खड़ा हो जाएगा.
मनोज झा ने सत्ता पक्ष से प्रश्न किया कि यह कैसा संवाद है. आप किसी की बात सुनते नहीं हैं, बस सुनाते हैं. आप मुस्लिमों की संस्थागत गैर-मौजूदगी सुनिश्चित कर रहे हैं. जल्दबाजी न करें. उन्होंने कहा, "इस देश के मुसलमान का इस मिट्टी पर कर्ज है और इस मिट्टी का मुसलमान पर कर्ज है. इस कर्ज के रिश्ते को व्यापारी की नजर से मत देखिए, तिजारत की नजर से मत देखिए.
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