Court on Delhi Violence Case: साल 2020 दिल्ली दंगा मामले में कपिल मिश्रा को राउज एवेन्यू कोर्ट के आदेश से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने कपिल मिश्रा के खिलाफ जांच के निचली अदालत के आदेश को राउज एवेन्यू कोर्ट ने खारिज कर दिया. फैसले के बाद उनकी भूमिका पर फिर सवाल उठे हैं. पुलिस ने आरोपों को साजिश बताया है, जबकि याचिकाकर्ता ने उन्हें भड़काऊ भाषण और हिंसा से जोड़ते हुए मौके पर कपिल मिश्रा के मौजूदगी को साबित किया था.
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Delhi News Today: केंद्रीय राजधानी दिल्ली में साल 2020 में दंग भड़क गए थे. इस भयावह दंगे में 53 लोगों की मौत हो गई थी और 580 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. मृतकों में 40 लोगों का ताल्लुक मुस्लिम समुदाय से था. आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तत्कालीन नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा के भड़काऊ नारे-बयानबाजी की वजह से दंगे भड़क गए. कपिल मिश्रा की वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी.
कपिल मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. सोमवार (10 नवंबर) दिल्ली दंगा मामले में मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ आगे की जांच कराने के निचली अदालत के आदेश को राउज एवेन्यू कोर्ट ने खारिज कर दिया है. दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दलील दी कि निचली अदालत ने याचिकाकर्ता की धारा 156(3) के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग को गलत तरीके से आगे की जांच में बदल दिया, जो कानूनी रूप से सही नहीं है. इसलिए इस आदेश को रद्द किया जाए.
दिल्ली पुलिस की कोर्ट में पेश की गई दलील पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट के इस फैसले से दिल्ली पुलिस और कपिल मिश्रा की भूमिका को लेकर फिर से सवाल खड़े होने लगे हैं. दिल्ली पुलिस के तर्क पर सहमति जताते हुए कपिल मिश्रा के खिलाफ दंगों में कथित तौर पर शामिल होने के मामले में आगे की जांच के आदेश को रद्द कर दिया.
अदालत ने दिल्ली पुलिस की ओर से दाखिल पुनरीक्षण (रिवीजन) याचिका पर नोटिस जारी किया था. यह याचिका अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के 1 अप्रैल के आदेश को चुनौती देने के लिए दाखिल की गई थी. दिल्ली पुलिस का कहना था कि मजिस्ट्रेट को यह बताया गया था कि दंगा और बड़ी साजिश से जुड़ा मामला UAPA के तहत पहले से स्पेशल कोर्ट में लंबित है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने स्पेशल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में दखल देते हुए आगे जांच का आदेश दे दिया.
निचली अदालत (मजिस्ट्रेट) ने अपने आदेश में कहा था कि शिकायत में कपिल मिश्रा के खिलाफ एक घटना के दौरान गंभीर अपराध के आरोप बनते हैं, इसलिए इस मामले में आगे की जांच जरूरी है. कोर्ट ने यह भी कहा था कि कपिल मिश्रा ने पूछताछ में स्वीकार किया था कि वह उस इलाके में मौजूद थे और उन लोगों के आसपास खड़े थे जिन्हें वह जानते थे. इसलिए उनकी मौजूदगी से इनकार नहीं किया जा सकता, जो शिकायतकर्ता के आरोपों को और मजबूत करता है.
यह शिकायत मोहम्मद इलियास नाम के शख्स ने दर्ज कराई थी. दिल्ली पुलिस ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि कपिल मिश्रा को दंगों से जोड़ने की एक सोची- समझी साजिश रची जा रही है. पुलिस का यह भी कहना था कि कपिल मिश्रा का दंगों से कोई लेना- देना नहीं है और उन्हें झूठे केस में फंसाया जा रहा है.
इलियास ने आरोप लगाया था कि दंगों के दौरान उन्होंने कपिल मिश्रा और उनके साथियों को सड़क जाम करते और पत्थर चलाते हुए देखा था. उन्होंने यह भी कहा था कि उस समय के DCP भी कपिल मिश्रा के पास खड़े थे. याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि उन्होंने (कपिल मिश्रा) प्रदर्शन कर रहे लोगों को धमकी दी थी कि अगर उन्होंने इलाका खाली नहीं किया तो संगीन नतीजे भुगतने होंगे. इलियास ने उस समय के जाफराबाद थाने के SHO और 5 अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की भी मांग की थी.
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