Advertisement
trendingNow,recommendedStories0/zeesalaam/zeesalaam3006154

विवादों में RSS, पाक सरकार के लिए काम करने वाली फर्म को दिया करोड़ों का कॉन्ट्रैक्ट

RSS Working with Pakistan:  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर एक गंभीर इल्जाम लग रहा है. आरोप है कि वह एक ऐसी संस्था के साथ काम कर रही है जो पाकिस्तान सरकार के लिए काम करती है.

विवादों में RSS, पाक सरकार के लिए काम करने वाली फर्म को दिया करोड़ों का कॉन्ट्रैक्ट

RSS Working with Pakistan: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अमेरिका की एक बड़ी लॉबिंग फर्म को हायर किया है, जो पाकिस्तान सरकार के लिए भी काम करती है, इस खुलासे के बाद भारत की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है और संघ की अंतरराष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं एवं वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं.

आरएसएस पर उठते सवाल

अमेरिकी न्यूज़ आउटलेट Prism की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार, RSS ने इस साल की शुरुआत में वॉशिंगटन डी.सी. में एक बड़े पैमाने पर लॉबिंग अभियान शुरू किया. अमेरिका सरकार के सामने जमा किए गए दस्तावेज़ों के मुताबिक, लॉबिंग फर्म Squire Patton Boggs (SPB) को 2025 के पहले तीन तिमाहियों में RSS की ओर से 3,30,000 डॉलर का भुगतान किया गया था.

पाकिस्तान से है कनेक्शन

यह विवाद इसलिए और बढ़ गया, क्योंकि SPB वही संस्था है जो पाकस्तान सरकार के लिए लॉबिंग का काम करती है. The New York Times की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के लॉबिंग अभियान के दौरान अमेरिका ने पाकिस्तान को फायदा पहुंचाने वाले कई फैसले किए, पाकिस्तान के लिए टैरिफ 29% से घटाकर 19 फीसद किया था वहीं भारत के टैरिफ को बढ़ाकर 50 फीसद कर दिया था.

Add Zee News as a Preferred Source

अपोज़ीशन का ज़ोरदार हमला

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने RSS पर देशहित के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया है. उन्होंने X पर लिखा,"RSS ने पाकिस्तान के आधिकारिक लॉबिंग समूह से जुड़ी अमेरिकी फर्म को पैसे देकर अपने लिए लॉबिंग कराई है. यह पहली बार नहीं है जब RSS ने देशहित के खिलाफ कदम उठाया हो."

आरएसएस नहीं देता है टैक्स
उन्होंने यह भी कहा कि RSS की विदेशों में खर्च की गई रकम और उसकी भारत में कानूनी स्थिति पर भी सवाल उठते हैं. रमेश ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि RSS एक अनरजिस्टर्ड संगठन है और टैक्स नहीं देता.

भागवत ने कही थी ये बात

मोहन भागवत ने 9 नवंबर को बेंगलुरु में कहा था कि सरकार ने हमें तीन बार बैन किया है, तो अगर RSS मान्यता प्राप्त नहीं है तो बैन किस पर लगाया गया? कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने इसके बाद RSS की वित्तीय जवाबदेही पर सवाल उठाए थे.

आरएसएस पर उठते सवाल

Prism की रिपोर्ट ने कई कानूनी मुद्दों को भी सामने रखा. SPB ने RSS के लिए अपना काम Lobbying Disclosure Act (LDA) 1995 के तहत दर्ज कराया. लेकिन कई विशेषज्ञों का कहना है कि इसे Foreign Agents Registration Act (FARA) 1938 के तहत दर्ज होना चाहिए था, क्योंकि RSS एक विदेशी संगठन है. अगर आरएसएस को FARA के तहत रजिस्टर किया जाता तो उसे अपनी हर बैठक, बातचीत और गतिविधि का विस्तृत रिकॉर्ड सार्वजनिक करना होता, जबकि LDA इतना सख्त नहीं है.

लॉबिंग के दस्तावेज़ बताते हैं कि RSS सीधे क्लाइंट के रूप में दर्ज नहीं है. इसके बजाय State Street Strategies और One+ Strategies नामक फर्में RSS की ओर से यह काम कर रही थीं. One+ Strategies के सह-संस्थापक बॉब शस्टर हैं, जिनके भाई बिल शस्टर (पूर्व अमेरिकी सांसद) SPB के लॉबिस्ट हैं और RSS अकाउंट पर काम कर रहे हैं.

दी वायर की रिपोर्ट के मुताबिक जून 2025 में बिल शस्टर, उनके भाई बॉब और SPB के एलिसन ने नागपुर जाकर RSS मुख्यालय का दौरा किया था. यहां उन्होंने एक ट्रेनिंग कैंप में हिस्सा लिया था. उनके साथ Wall Street Journal के कॉलमिस्ट वॉल्टर रसेल मीद और हडसन इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ बिल ड्रेक्सल भी थे.

आरएएस ने इस रिपोर्ट पर क्या कहा?

Prism की रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही, RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इस दावे को पूरी तरह नकार दिया. उन्होंने X पर लिखा कि RSS भारत में ही काम करता है और अमेरिका में किसी लॉबिंग फर्म को हायर नहीं किया गया है.

About the Author
author img
Sami Siddiqui

समी सिद्दीकी उप्र के शामली जिले के निवासी हैं, और 6 से दिल्ली में पत्रकारिता कर रहे हैं. राजनीति, मिडिल ईस्ट की समस्या, देश में मुस्लिम माइनॉरिटी के मसले उनके प्रिय विषय हैं. इन से जुड़ी सटीक, सत्य ...और पढ़ें

TAGS

Trending news