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Delhi News Today: देश में मुसलमानों के खिलाफ नफरत अब खुलेआम देखने को मिल रही है. केंद्रीय राजधानी दिल्ली में मुसलमान महफूज नहीं है. इसकी वजह है कि अब कथित दक्षिणपंथी विचारधारा वाले नेताओं और संगठनों ने धर्म के नाम पर बाजार तक बांटने लगे हैं. कुछ ऐसा ही देखने को मिला दिल्ली के सागरपुर इलाके में, जहां एक हिंदूवादी नेता ने एक मुस्लिम दुकानदार पर उसकी दुकान का नाम बदलवाने का दबाव बनाया. अब सवाल ये है कि क्या दूध-दही बेचने के लिए भी धर्म का सर्टिफिकेट चाहिए?
यह पूरा मामला 21 अगस्त का है. दिल्ली के सागरपुर में 'हरियाणा डेयरी एंड पनीर भंडार' नाम की एक दुकान पर कुछ लोग कूड़ा और गंदगी फेंकने की बात पूछने गए थे. जिसमें कथित हिंदूवादी नेता विपिन राजपूत भी था. दुकानदार से पूछताछ के दौरान आरोपी ने पूछा कि उसका नाम क्या है? जैसे ही उसे पता चला कि दुकानदार का ताल्लुक मुस्लिम समुदाय से तो वह भड़क गया.
“क्या नाम है तुम्हारा? तुम अपने नाम से दुकान का नाम रखो! पता होना चाहिए दुकान किसकी है!”
दिल्ली के सागरपुर में 21 अगस्त को हिंदूवादी नेता ने "हरियाणा डेयरी एंड पनीर भंडार" नामक एक मुस्लिम स्वामित्व वाली दुकान पर गए और मुस्लिम मालिक के धर्म के अनुसार दुकान का नाम बदलने को बोला! pic.twitter.com/LOKkjcJINB
— Muslim Spaces (@MuslimSpaces) August 23, 2025
इस घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. वीडियो में सुना जा सकता है कि आरोपी दुकानदार से पूछता है कि पीछे जो कूड़ा-कबाड़ और खराब फर्नीचर पड़ा क्या वह आपने डाला है? इस पर दुकानदार इंकार कर देता है. इस पर विपिन राजपूत, दुकानदार का नाम पूछता है. दुकानदान बताता है कि उसका नाम साहिल है. यह सुनकर आरोपी विपिन राजपूत गुस्से में कहता है कि अपने नाम से बोर्ड लगा और यहां से तत्काल हरियाणा डेयरी का बोर्ड हटाओ.
आरोपी इस दौरान जोर देते हुए कहता है कि उसकी दुकान पर जो नाम वह हटना चाहिए, जिससे लोगों को पता चले कि यह दुकान किसकी है. विपिन राजपूत की धमकी सुनकर पीड़ित दुकानदार सहम गया और उसने जल्द ही दुकान पर अपने नाम का बोर्ड लगाने की हामी भर दी. वीडियो में हिंदूवादी संगठन से ताल्लुक रखने वाले एक शख्स कहता है कि इसका नाम साहिल नहीं बल्कि राहिल खान है. दूसरी तरफ एक और शख्स धमकी देते हुए कहता है कि नाम हटा लेना और अगर नहीं हटाओगे तो क्यूआर कोड से स्कैन कर पता लगायेंगे और फिर आगे देखा जाएगा.
मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस भी हरकत में आ गई है. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दिया है. वायरल वीडियो पर लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है. यूजर्स पूछ रहे हैं क्या अब दुकान का नाम भी धर्म देखकर रखा जाएगा, क्या अब रोजगार से पहले धर्म की पहचान जरूरी है? इस संबंध में सागरपुर पुलिस स्टेशन के एसएचओ से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.
बता दें, दिल्ली के सागरपुर में ही 20 जून को एक मुस्लिम दंपति को उनकी धार्मिक पहचान के चलते किराए के घर से जबरन निकाले जाने का मामला सामने आया था. इस घटना की वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही थी. वायरल वीडियो में हिंदूवादी नेता महिला किरायेदार से उसका नाम और धर्म पूछता है. 'सकीना' नाम सुनते ही वह भड़क जाता है और पूछता है, "मुस्लिम नाम से हिंदू बनकर कमरा क्यों लिया?" पीड़िता के मुताबिक, आधार कार्ड और सभी दस्तावेज पहले ही दिए गए थे, फिर भी उन्हें बांग्लादेशी कहकर घर से निकाल दिया गया.