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Saharanpur News: क्या मुस्लिम शादियों में DJ, नाच-गाना और आतिशबाजी को अल्लाह की नाफ़रमानी माना जाना चाहिए? तो, गाने, एक्टिंग और स्टेज परफॉर्मर को कैसे देखा जाना चाहिए? इन्हीं सवालों पर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के लोग दो ग्रुप में बंट गए और हर ग्रुप ने अपनी-अपनी राय दी.
कुछ लोग कारी और मौलानाओं की बात का समर्थन कर रहे हैं, तो वहीं कुछ लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं. समर्थकों का कहना है कि इस्लाम में शादी यानी निकाह को बेहद सादगी और इबादत के साथ करने का हुक्म दिया गया है, जबकि विरोध करने वाले लोग इसे व्यक्तिगत आजादी और पेशे से जोड़कर देख रहे हैं.
मौलाना हाजी उवैश के मुताबिक हराम है गाना-बजाना
दरअसल, मौलाना हाजी उवैश के मुताबिक, शरीयत में शादी के मौके पर आतिशबाजी, डीजे, नाच-गाना और बैंड-बाजा की कोई गुंजाइश नहीं है. उन्होंने कहा कि निकाह एक नई जिंदगी की शुरुआत है और जितनी सादगी से यह होगा, उतना बेहतर होगा. आजकल फैशन के नाम पर लोग डीजे, नाच-गाना और आतिशबाजी कर रहे हैं, लेकिन शरीयत इसकी इजाजत नहीं देती.
मोहम्मद यूनुस ने क्या कहा?
वहीं मोहम्मद यूनुस के मुताबिक, इस्लाम जो कहता है उसका पालन करना हर मुसलमान का फर्ज़ है. उन्होंने कहा कि निकाह के वक्त दुआएं पढ़ी जाती हैं, फरिश्तों की मौजूदगी मानी जाती है और ऐसे पाक मौके पर शोर-शराबा, आतिशबाजी और डीजे करना गलत है. अल्लाह को सादगी पसंद है, दिखावा नहीं.
इस्लाम में इजाजत नहीं है
वहीं, श्याम अली कहते हैं कि लोगों की आदतें और शौक और शरिया दो अलग-अलग चीजें हैं. अगर कोई इसे अपना प्रोफेशन बनाता है तो उसके लिए यह अलग बात है, लेकिन अगर हम इस्लाम की बात करें तो इस्लाम में इसकी कोई इजाज़त नहीं है.