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Zee SalaamIndian MuslimRSS कट्टर और मुस्लिम विरोधी नहीं है... पसमांदा मुस्लिम मंच को क्यों पसंद आ रहा संघ?

"RSS कट्टर और मुस्लिम विरोधी नहीं है..." पसमांदा मुस्लिम मंच को क्यों पसंद आ रहा संघ?

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हिंदुस्तानी पसमांदा मंच के प्रवक्ता मोहम्मद रिजवान अंसारी ने संगठन की विचारधारा रखते हुए सामाजिक न्याय, पहचान और एकता पर जोर दिया. इसके साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर अपनी राय भी सामने रखी. उन्होंने दावा किया कि (RSS) मुसलमानों का दुश्मन नहीं है और न ही कट्टर है. पूरी खबर जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें. 

"RSS कट्टर और मुस्लिम विरोधी नहीं है..." पसमांदा मुस्लिम मंच को क्यों पसंद आ रहा संघ?

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं. इस चुनाव को लेकर सहारनपुर में अभी से ही सियासी सरगर्मी तेज होती नजर आ रही है. इसी कड़ी में हिंदुस्तानी पसमांदा मंच ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर बड़ी बातें कहीं. हिंदुस्तानी पसमांदा मंच के राष्ट्रीय प्रवक्ता मोहम्मद रिजवान अंसारी ने मीडिया से बातचीत करते हुए संगठन की विचारधारा और उद्देश्यों को विस्तार से रखा. प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS को लेकर भी बड़ा बयान दिया

रिजवान अंसारी ने कहा कि हिंदुस्तानी पसमांदा मंच देश के उस मेहनतकश मुस्लिम वर्ग की आवाज है, जिसने सदियों से अपनी मेहनत और कौशल से राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया, लेकिन सामाजिक भेदभाव, राजनीतिक उपेक्षा और तथाकथित सेक्युलर दलों की वोट बैंक राजनीति के कारण अपने अधिकारों से वंचित रहा. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पसमांदा समाज अपनी अलग पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करे.

रिजवान अंसारी ने कहा कि वर्षों से RSS के बारे में जो धारणाएं बनाई गईं, वे पूरी तरह सही नहीं हैं. उनके अनुसार RSS न तो मुसलमानों का दुश्मन है और न ही कट्टरता का प्रतीक, बल्कि यह एक ऐसा संगठन है जो राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता की बात करता है. वहीं, मुस्लिम धर्मगुरुओं और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग मुस्लिम समुदाय को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं. 

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रिजवान अंसारी ने कहा कि मुसलमानों को RSS से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि अपने ही समाज के उन लोगों से सावधान रहने की जरूरत है जो उन्हें गुमराह करते हैं. आखिर में उन्होंने कहा कि पसमांदा मंच का संघर्ष केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं, बल्कि लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है.

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Zeeshan Alam

जीशान आलम Zee Media में ट्रेनी जर्नलिस्ट हैं. वह बिहार के छपरा के निवासी हैं और दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया है. सियासत और मुस्लिम माइनॉरिटी से जुड़ी ख़बरें वो आ...और पढ़ें

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