Muslim Leaders on Waqf Amendment Act 2025: वक्फ संशोधन कानून को लेकर पूरे देश में घमासान छिड़ा हुआ है. कांग्रेस के सीनियर नेता राशिद अल्वी ने कहा कि बीजेपी देश को तबाही की ओर ले जाना चाहती है, जबकि मौलाना साजिद रशीदी वक्फ कानून को लेकर सांसद असदुद्दीन ओवैसी की आलोचना की है.
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Waqf Amendment Act 2025 Controversy: वक्फ संशोधन कानून को लेकर देशभर में विरोध-प्रदर्शन का सिलसिला तेज हो गया है. जहां एक ओर मौलाना साजिद रशीदी ने इस कानून का समर्थन किया है, वहीं कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने इसे मुसलमानों के धर्म में हस्तक्षेप करार देते हुए भाजपा सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है.
मौलाना साजिद रशीदी ने वक्फ संशोधन कानून को लेकर कहा कि इसमें ऐसा कुछ नहीं है, जिसे लेकर सड़कों पर उतरा जाए. उन्होंने कहा, "इस कानून में ऐसा कुछ नहीं है, जिसका विरोध किया जाए." साजिद रशीदी ने AIMIM प्रमुख पर निशाना साधते हुए कहा, "ओवैसी जैसे लोग देश में दंगा कराना चाहते हैं. वह बयान देकर माहौल को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि खुद को जिन्ना की तरह पेश कर सकें."
मौलाना साजिद रशीदी ने आगे कहा कि जो लोग शोर मचा रहे हैं, उन्हीं के पास वक्फ की जमीनें हैं. हम मुसलमान इस देश के नागरिक हैं, हमने आजादी की लड़ाई में कुर्बानियां दी हैं. हमें पत्थरबाज का टैग नहीं चाहिए. साजिद रशीदी का यह बयान उनके जरिये हनुमान जयंती और हिंदू शोभा यात्रा पर दिए गए विवादित बयान के कुछ देर बाद आया है.
वहीं, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने मुर्शिदाबाद में वक्फ संशोधन कानून के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शन पर भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा, "जब किसी मजहब पर हमला होता है, तो उसके गंभीर परिणाम होते हैं. केंद्र सरकार का यह कानून मुसलमानों के धार्मिक मामलों में दखल है."
कांग्रेस सीनियर नेता राशिद अल्वी ने चेताया कि इस तरह की नीति से देश में धार्मिक असंतुलन पैदा हो सकता है. उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन केंद्र सरकार के उस रवैये के खिलाफ है, जिसमें मुसलमानों के धर्म पर हमला किया गया है. यह लड़ाई हिंदू-मुसलमान की नहीं, सरकार की नीतियों की है.
अल्वी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, "भाजपा हमेशा हिन्दू-मुस्लिम की लड़ाई दिखाकर देश को तबाही की ओर ले जाना चाहती है. अगर सरकार ने किसानों का कानून वापस लिया, तो मुसलमानों के इस कानून को भी वापस लेना चाहिए." उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह संवाद का रास्ता अपनाए और प्रदर्शनकारियों की बात सुने. साथ ही यह भी कहा कि "हिंसा किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है, लोकतंत्र में विरोध शांति से होना चाहिए.
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