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Sambha Neza Mela Dispute: संभल में नेज़ा मेला को लेकर काफी विवाद हो रहा है. प्रशासन ने इसे कराने की इजाजत नहीं दी है और साथ ही वॉर्निंग भी दी है कि अगर इसे आयोजित किया गया और माहौल खराब हुआ तो उसका भुगतान नेज़ा कमेटी के कुछ सेलेक्टेड जिम्मेदारान से लिया जाएगा. अब इस मामले में समाजवादी पार्टी एमपी जिया उर रहमान बर्क का बयान आया है. उन्होंने सैयद सोलार मसूद गाजी को एक सूफी संत करा दिया है.
संभल के एमपी का कहना है कि सोमनाथ अटैक से मसूद गाजी को जोड़ना बिलकुल सही नहीं है. बता दें, गाजी की याद में ही यह मेला हर साल लगाया जाता है. सांसद ने दावा किया कि इतिहासकार भी इस बात की तस्दीक की है कि जब सोमनाथ हमला हुआ था, तब उनकी केवल 11 साल थी और इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं थी. इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारी बार-बार बिना ठोस ऐतिहासिक तथ्यों के अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे नफरत फैल रही है.
एचटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, संभल के एक पुलिस अधिकारी के बयान पर फिक्र का इज़हार करते हुए हुए बर्क ने सवाल उठाया कि संविधान को बनाए रखने की शपथ लेने वाले लोग धार्मिक मान्यताओं को कमजोर करने वाली टिप्पणी कैसे कर सकते हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संविधान हर नागरिक को आज़ादी से पूजा या प्रार्थना करने का अधिकार देता है.
सांसद ने कहा कि सालार मसूद गाजी मानवता के उत्पीड़न के खिलाफ खड़े हुए और उन्होंने अपनी ज़िंदगी लोगों की मदद करने में समर्पित कर दी. उन्होंने पारंपरिक नेज़ा मेले को रोकने के किसी भी कोशिश की निंदा की और इसे अनैतिक और संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ बताया. बता दें, इस मामले में पुलिस ने नेज़ा कमेटी के पांचमेंबर्स के खिलाफ पांच-पांच लाख रुपये मुचलके के लिए लिए पाबंद किए हैं.