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Sambhal Violence Case: उत्तर प्रदेश में बीते साल 24 सितंबर 2024 को संभल में शाही जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी. इस हिंसा के दौरान पुलिसिया कार्रवाई के दौरान 5 मुसलमानों की मौत हो गई थी. संभल हिंसा के एक साल बाद भी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. हालांकि, समय-समय पर मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी दलों प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े करते रहे हैं.
संभल हिंसा के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करने का दावा करते हुए इस घटना के कथित मुख्य आरोपी मुल्ला अफरोज पर रासुका (NSA) लगा दिया है. मिली जानकारी के मुताबिक, हिंदू संगठनों के दावे के बाद कोर्ट के आदेश पर सर्वे के शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा में विदेशी हथियारों से पुलिस पर गोली चलाने का आरोप है.
पुलिस का आरोप है कि यह काम मुल्ला अफरोज ने ही किया है, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी. पुलिस ने फायरिंग और हत्या के मामले में मुल्ला अफरोज, गुलाम और वारिस के खिलाफ केस दर्ज किया था. फिलहाल तीनों को गिरफ्तार कर मुरादाबाद जेल में बंद किया गया है. एसपी कृष्ण विश्नोई ने बताया कि मुल्ला अफरोज के बाद अब गुलाम और वारिस पर भी रासुका लागू करने की तैयारी की जा रही है.
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण को लेकर हुई हिंसा लगातार सुर्खियों में है. यह मस्जिद करीब 500 साल पुरानी है. हिंदूवादी संगठनों ने ASI के जरिये संरक्षित इस ऐतिहासिक मस्जिद को लेकर दावा किया गया था कि यह एक मंदिर पर बनी है. हिंदूवादी संगठनों ने इसको लेकर कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने जामा मस्जिद के सर्वे के आदेश दिए थे.
ऐतिहासिक शाही मस्जिद के दूसरी बार सर्वे के दौरान 24 नवंबर 2024 को हिंसा भड़क गई, जब मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान भारी विरोध प्रदर्शन हुआ. इससे पहले पहला सर्वेक्षण 19 नवंबर 2024 को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ था, लेकिन दूसरा सर्वेक्षण शुरू होते ही विरोध प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया. इस दौरान पुलिस और भीड़ में झड़प हो गई थी. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोलीबारी में पांच मुस्लिम नौजवानों की मौत हो गई थी.
इस मामले में पुलिस ने कुल 10 से ज्यादा एफआईआर दर्ज किया है, जिसमें लगभग 2,500 से ज्यादा लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है. इस मामले में अब तक 80 से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें से कई पर रासुका लगाया गया है. हालांकि, इस दौरान कोर्ट ने 78 से ज्यादा याचिकाएं कर दीं. जबकि कुछ आरोपियों को जमानत भी मिल चुकी है.