Bengal Sandeshkhali Witness Accident: संदेशखाली केस में गवाह की मौत और सीबीआई की रिपोर्ट ने शेख शाहजहां की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. जमीन कब्जे से जुड़े हजारों शिकायतों के सबूत अदालत में उनका भविष्य तय करेंगे. मुर्शिदाबाद बाबरी मस्जिद के बाद अब संदेशखाली मामला एक बार फिर बंगाल की सियासत में तनाव का केंद्र बन गया है.
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Sandeshkhali Case: पश्चिम बंगाल इस समय देश की सियासत में सुर्खियों में है. मुर्शिदाबाद के बाद अब प्रदेश उत्तर 24 परगना जिले में संदेशखाली केस को लेकर फिर तनाव बढ़ गया है. संदेशखाली केस में अदालत में गवाही देने जा रहे महत्वपूर्ण गवाह भोला नाथ घोष की कार रास्ते में दुर्घटना का शिकार हो गई. इस हादसे में गवाह के बेटे और ड्राइवर की मौत हो गई. इस हादसे के आरोप टीएमसी नेता शेख शाहजहां पर लग रहे हैं.
आरोप है कि शेख शाहजहां ने जेल के अंदर बैठकर इस वारदात की साजिश रची. अटकलें लगा रही हैं कि इस घटना के बाद शेख शाहजहां की परेशानियां बढ़ सकती हैं. सीबीआई ने कलकत्ता हाईकोर्ट में एक जांच रिपोर्ट दाखिल की है, जिसमें कहा गया है कि शाहजहां के खिलाफ जमीन पर जबरन कब्जा करने के आरोपों से जुड़े सबूत मौजूद हैं. शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि खेती करने लायक जमीनों में खारा पानी छोड़ दिया गया है, जिससे वह दलदल में बदल जाएं.
सीबीआई ने आरोपियों में शाहजहां और उनकी टीम का नाम शामिल किया गया है. हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने संदेशखाली क्षेत्र में कैंप ऑफिस स्थापित किया था और गांव-गांव जाकर लोगों की शिकायतें दर्ज की थीं. सीबीआई के मुताबिक, जमीन कब्जे से जुड़ी शिकायतों में से लगभग 3000 शिकायतों में पर्याप्त जानकारी और सबूत मिले हैं. इन्हीं शिकायतों की जांच के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है.
सीबीआई सूत्रों का कहना है कि जांच में इस बात के भी सुबूत मिले हैं कि शाहजहां की फोर्स उसके भाई की अगुवाई में इलाके में जमीनों पर कथित तौर कब्जे की कार्रवाई करती थी. लगभग तीन हजार शिकायतों की जांच के बाद तैयार विस्तृत रिपोर्ट हाईकोर्ट में जमा कर दी गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाहजहां के केस जुड़ी ज्यादातर अहम जानकारियां कोर्ट को सौंप दी गई हैं.
सीबीआई की जांच रिपोर्ट अगर अदालत में सही साबित होती है तो शाहजहां की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक जबरन जमीन हड़पने के आरोपों में ठोस तत्व पाए गए हैं, जिसकी वजह से जमानत मिलना भी उनके लिए मुश्किल हो सकता है.
गौरतलब है कि साल 2024 में ईडी ने राशन घोटाले की जांच के लिए जब शाहजहां के घर पहुंची थी, तब जांच टीम को बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ा था. उसी घटना के बाद संदेशखाली विवाद शुरू हुआ, जिसने धीरे-धीरे पूरे प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी थी.
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