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Jannatul Baqi: उमराह करने के लिए गए 45 लोगों की एक बस हादसे में मौत हो गई थी. यह हादसा इतना भयानक था कि लोगों की शनाख्त तक नहीं हो पा रही थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक बस एक डीजल ले जा रहे ट्रक से जा टकराई, जिसकी वजह से भयानक आग लग गई और सभी की मौके पर ही मौत हो गई. इस हादसे में केवल 1 शख्स ही जिंदा बच पाया. इस हादसे में मारे गए लोगों को आज जन्नतुल बकी में दफ्न किया जाएगा. आइये जानते हैं क्या है इस कब्रिस्तान की अहमियत.
मदीना में पैगंबर की मस्जिद (मस्जिदे-नबवी) में हर फर्ज नमाज़ के बाद जनाज़े की नमाज़ (सलातुल जनाज़ा) अदा की जाती है. यहां रोज़ाना कई जनाज़े की नमाज़ें होती हैं. हालांकि, जन्नतुल बकी में दफनाने का प्रोसेस बेहद सख्त और कंट्रोल्ड है. यह कब्रिस्तान इस्लाम के सबसे महत्वपूर्ण कब्रिस्तानों में से एक है, जहां पैगंबर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के परिवार वालों और शुरुआती सहाबा की कब्रें मौजूद हैं.
सीमित जगह और कड़े नियमों की वजह से सिर्फ वही लोग जन्नतुल बकी में दफन किए जा सकते हैं, जिनकी मौत मदीना में हुई हो और जिन्हें स्थानीय अधिकारियों से औपचारिक मंजूरी मिल जाए.
रिपोर्ट के मुताबिक, यहां हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (रज़ि.), तीसरे ख़लीफ़ा हज़रत उस्मान बिन अफ़्फान (रज़ि.) और पैगंबर (स.अ) के चाचा हज़रत अब्बास (रज़ि.) की कब्रे हैं. इसके अलावा, पैगंबर (स.अ) की बीवियां- जिनमें हज़रत आयशा (रज़ि.), हज़रत उम्मे सलमा (रज़ि.), हज़रत हफ़्सा (रज़ि.) और अन्य उम्महातुल मोमिनीन शामिल हैं, वे भी यहीं दफ्न हैं. पैगंबर की बेटियां हज़रत ज़ैनब (रज़ि.), हज़रत रुकय्या (रज़ि.) और हज़रत उम्मे कुलसूम (रज़ि.) की कब्रें भी इसी कब्रिस्तान में मौजूद हैं.
परिवार पैगंबर की मस्जिद से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर एक होटल में रुके हैं, जिसका इंतज़ाम तेलंगाना सरकार ने किया है. कुछ रिश्तेदारों ने बॉडी देखने की इजाज़त मांगी, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें बताया कि बॉडी की हालत की वजह से यह मुमकिन नहीं हो पाएगा. डीएनए की प्रक्रिया पूरी हो गई है और आज उनकी तदफीन होनी है.