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खत्म हुआ मोटी कमाई का दौर, सऊदी में भारतीयों को अब नहीं मिलेंगे हाई-इंक्रीमेंट ऑफर!

Salary Recession in Saudi Arabia: सऊदी अरब की नई 'सैलरी पॉलिसी' ने विदेशी कर्मचारियों, खासकर भारतीयों पर सीधा असर डाल सकती है. सैलरी में कटौती से न सिर्फ लाखों भारतीय कामगार प्रभावित होंगे बल्कि भारत को मिलने वाला रेमिटेंस भी कम हो सकता है, जिसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.

 

(प्रतीकात्मक AI तस्वीर)
(प्रतीकात्मक AI तस्वीर)

Saudi Arabia Job News: भारत में नौकरियों की कमी हमेशा से रही है और चुनाव में रोजगार बड़ा मुद्दा भी होता है. इसके बावजूद हालात जस के सत हैं. ऐसे में बेहतर भविष्य की तलाश में हर साल पूरे भारत से बड़ी संख्या नौजवान मिडिल ईस्ट का रूख करते हैं. देश का एक बड़ा तबका मिडिल ईस्ट में नौकरी कर परिवार का पेट पालता है, उनमें से बड़ी संख्या सऊदी अरब में काम करने वाले लोगों की है. 

सऊदी अरब में बेहतर नौकरी का ख्वाब देख रहे लोगों के लिए बुरी खबर है. इसकी वजह यह है कि सऊदी सरकार अब विदेशी कर्मचारियों को भारी भरकम सैलरी नहीं देगी. दरअसल, सऊदी अरब ने विदेशी कर्मचारियों को मिलने वाली मोटी तनख्वाह और आकर्षक सुविधाओं में बड़ी कटौती कर दी है. वजह है आर्थिक प्राथमिकताओं में बदलाव और खर्चों पर सख्त नियंत्रण के चलते यह फैसला लिया गया है. 

सऊदी में नहीं मिलेगी अब भारी भरकम सैलरी

खाड़ी देशों में सक्रिय कई अंतरराष्ट्रीय रिक्रूटर्स ने इसकी पुष्टि की है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब अपने मेगा डेवलपमेंट प्रोजेक्ट 'विजन 2030' का आधा से ज्यादा सफर पूरा कर चुका है. इस योजना का मकसद तेल पर निर्भरता कम करना, बड़े पैमाने पर रोजगार के मौके पैदा करना और पर्यटन, खनन, वित्तीय सेवाओं, लॉजिस्टिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों को मजबूत बनाना है.

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बीते साल तक सऊदी कंपनियां विदेशी एक्सपर्ट कर्मचारियों को निर्माण, मैन्युफैक्चरिंग और मेगा प्रोजेक्ट्स में नौकरी देने के लिए 40 फीसदी तक या उससे भी ज्यादा सैलरी में इंक्रीमेंट ऑफर करती थीं. हालांकि, अब इसमें बड़े पैमाने पर बदलाव हुआ है. कंपनियों के लिए रिक्रूट करने वाले लोगों का कहना है कि "ऐसी दिल खोलकर दी जाने वाली पेशकश खत्म हो चुकी है. आने वाले दिनों में यह एक सपना हो जाएगा."

सैलरी में कटौती पर एक्सपर्ट्स ने क्या कहा?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सऊदी कंपनियां अब वास्तविक बाजार दरों, कर्मचारी के प्रदर्शन और अपने बजट को ध्यान में रखते हुए ही सैलरी की पेशकश कर रही हैं. बोई डन के मैनेजिंग डायरेक्टर मग्दी अल-जीन ने कहा कि एक तरफ सरकार खर्चों में अनुशासन अपना रही है और दूसरी तरफ इस क्षेत्र में आने वाले विदेशी एक्सपर्ट्स की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे कंपनियां वेतन पैकेज को दोबारा तय करने पर मजबूर हैं.

मग्दी अल-जीन ने बताया कि पहले विदेशी पेशेवरों की भारी मांग के कारण कंपनियां ऊंची तनख्वाह देकर उन्हें आकर्षित करती थीं, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. खर्च नियंत्रण की नीति और विदेशी कर्मचारियों की बढ़ती संख्या ने कंपनियों को सैलरी स्ट्रक्चर पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है. इसका सीधा असर भारतीय कर्मचारियों पर भी पडे़गा और देश को होने वाले विदेशी मुद्रा भंडार पर भी असर डालेगा. 

सऊदी में 23 से 35 लाख प्रवासी भारतीय करते हैं काम  

मीडिया रिपोर्ट्स और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मिडिल ईस्ट देशों में भारत के लगभग 92.58 लाख लोग काम कर रहे हैं. इनमें सबसे बड़ा हिस्सा सऊदी अरब का है, जहां लगभग 23 से 25 लाख भारतीय प्रवासी काम करते हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2023–24 में सऊदी में भारतीय कर्मचारियों की संख्या में 2 लाख का इजाफा दर्ज किया गया.

भारतीयों के विदेश में काम करने से देश को सबसे ज्यादा फायदा रेमिटेंस (विदेश से भेजे गए पैसे) के रूप में मिलता है. यह पैसा सीधे उनके परिवारों तक जाते हैं और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं. 2023–24  वित्तीय वर्ष में भारत को कुल 129 बिलियन डॉलर (करीब 10.8 लाख करोड़ रुपये) का रेमिटेंस मिला. इसमें सबसे बड़ा योगदान मिडिल ईस्ट देशों से होने वाली आमदनी का रहा है. 

सऊदी से मिलता है 8 बिलियन डॉलर रेमिटेंस

रेमिटेंस के आंकड़ों की बात करें तो सऊदी अरब से भारत को हर साल लगभग 8 बिलियन डॉलर (करीब 67,000 करोड़ रुपये) भेजे जाते हैं, जो देश को मिलने वाले कुल रेमिटेंस का 6.7 फीसदी है. वहीं पूरे गल्फ और मिडिल ईस्ट रीजन, जिनमें यूएई, सऊदी अरब, कतर, कुवैत और ओमान शामिल हैं, से भारत को लगभग 45 बिलियन डॉलर हासिल होता हैं. यह कुल रेमिटेंस का लगभग 35 फीसदी हिस्सा है.

ये रेमिटेंस भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं और देश की अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, रेमिटेंस का भारत की GDP में लगभग 3.4 फीसदी योगदान होता है. आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2024–25 में भारत को मिलने वाला कुल रेमिटेंस बढ़कर 135 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जो देश की आर्थिक स्थिति को और मजबूत करेगा. हालांकि, सऊदी सरकार के नए फैसले से भारत को झटका लग सकता है.

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Raihan Shahid

रैहान शाहिद का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर ज़िले से हैं. वह पिछले पांच सालों से दिल्ली में सक्रिय रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं. Zee न्यूज़ से पहले उन्होंने ABP न्यूज़ और दू...और पढ़ें

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