Assam News: असम में 2022 में हुए एनकाउंटर्स के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है. अब इन मामलों की जांच ह्यूमन राइट कमीशन के जरिए की जाएगी. पूरी खबर पढ़ने के लिए स्क्रॉल करें.
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Assam News: सुप्रीम कोर्ट ने असम में कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए असम मानवाधिकार आयोग को निर्देश दिया है. यह फैसला एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के जरिए 2014 में पीयूसीएल मामले में तय किए गए मुठभेड़ों की जांच से संबंधित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है.
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, जो याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए, ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट के जरिए 2014 में तय किए गए दिशा-निर्देशों की असम सरकार ने खुलकर अनदेखी की है.
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन.के. सिंह की पीठ ने कहा कि ये आरोप गंभीर हैं और इनके लिए निष्पक्ष जांच की जरूरत है. यह मामला असम में पुलिस मुठभेड़ों से जुड़ा है, न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि अगर सरकारी अधिकारियों के जरिए ताकत का गलत इस्तेमाल या गैरकानूनी फोर्स का इस्तेमाल हुआ है तो यह नाकाबिले माफी है. केवल केस फाइलों को जमा कर देना काफी नहीं है, क्योंकि इससे दोषी बच सकते हैं.
पिटीशनर की तरफ से 117 पुलिस मुठभेड़ों की लिस्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई. हालांकि, अदालत ने साफ किया कि इन मामलों को जांच के बिना झूठा नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने कहा इनमें से कौन-से मामले सच हैं, यह पता करना जरूरी है. हर केस में न्याय का आकलन एक व्यक्तिगत दृष्टिकोण से करना होगा. आसान भाषा में समझें तो हर मामले की अलग-अलग जांच होना जरूरी है.
असम ह्यूमन राइट कमीशन राज्य के अखबारों (अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में) में नोटिस प्रकाशित कर मुठभेड़ों से प्रभावित परिवारों को अपनी बात रखने का मौका देगा. आयोग को इस जांच प्रक्रिया में स्वतंत्र और निष्पक्ष मेंबर्स को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है. राज्य सरकार को आयोग की जांच में कोई प्रशासनिक बाधा न खड़ी करने और आवश्यक फॉरेंसिक सहायता व संसाधन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.
जनवरी 2023 में गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें असम में पुलिस मुठभेड़ों पर सवाल उठाए गए थे. उसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि मई 2021 से याचिका दाखिल होने तक राज्य में 80 से ज्यादा कथित फर्जी मुठभेड़ें हुईं, जिनमें 28 लोगों की मौत हुई. राज्य सरकार के हलफनामे में कबूल किया गया कि मई 2021 से अगस्त 2022 तक 171 पुलिस मुठभेड़ की घटनाएं हुईं, जिनमें 56 लोगों की जान गई और 145 घायल हुए थे.