Supreme Court News: मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा साल 2022 में सुनाए गए एक फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. कलक्ता हाईकोर्ट ने एक मुस्लिम महिला द्वारा तलाक के बाद सामान वापस करने की मांग वाले याचिका पर फैसला दिया, जो महिला के पति के पक्ष में था. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए उस पति को 6 हफ्ते के अंदर तलाकशुदा उसकी पूर्व पत्नी के खाते में पैसा डालने का आदेश दिया है.
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Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के पक्ष में एक अहम फैसला सुनाया है. बीते मंगलवार (2 नवंबर) को सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा कि तलाकशुदा मुस्लिम महिला को उसकी शादी के समय अपने माता-पिता द्वारा अपने या अपने पति को दिए गए कैश, सोना और दूसरी चीजें कानूनी तौर पर वापस पाने का अधिकार है.
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के शादी में मिली चीजों को वापस लेने के अधिकार वाला फैसला उनकी फाइनेंशियल सिक्योरिटी मजबूत करने के मकसद से दिया. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि शादी के समय महिला के घर वालों द्वारा उसे या उसके पति को दिए गए चीजों को महिला की प्रॉपर्टी माना जाना चाहिए और शादी खत्म होने के बाद उसे वापस कर दिया जाना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने इस फैसले को सुनाया है. दो जजों की इस बेंच ने कहा कि मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) एक्ट, 1986 के नियमों का मतलब इस तरह निकाला जाना चाहिए कि यह बराबरी और ऑटोनॉमी के संवैधानिक वादे को पूरा करे, न कि इसे सिर्फ सिविल-डिस्प्यूट के नजरिए से देखा जाए.
दो जजों की इस बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट संवैधानिक संस्था के तौर पर काम करता है, जो सुधार और जेंडर-जस्टिस के लिए प्रतिबद्ध है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस फैसले में कहा कि कानूनी मतलब को सामाजिक हकीकत से अलग नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि गांव और देश के अंदरूनी इलाकों में आज भी पुरुषों द्वारा महिलाओं के साथ भेदभाव है.
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा साल 2022 में दिए गए एक फैसले को खारिज करके दिया है. कलकत्ता हाईकोर्ट ने तालकशुदा महिला को सामान लौटाने का मामला सिर्फ एक दिवानी मामले के तौर पर निपटाया था. कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपने फैसले में पति को शादी के बाद कुछ सामान वापस न करने के लिए राहत दी थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया है और शादी में महिला के घर के तरफ से मिली सभी सामान वापस लेने का अधिकार दिया है.