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Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में गैर-कानूनी गतिविधि रोक-थाम अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार तीन मुस्लिम व्यक्तियों को रिहा कर दिया और पुलिस रिमांड को रद्द कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए फैसला दिया कि पुलिस ने इन लोगों को UAPA के तहत गिरफ्तार किया. लेकिन UAPA के तहत गिरफ्तार करने की शर्तों को पूरा नहीं किया.
दरअसल, NIA ने जिन तीन लोगों को देश के खिलाफ काम करने के इल्जाम UAPA के तहत गिरफ्तार किया था, उनमें से एक हिज्ब उत-तहरीर (HT) का नेता था. उन पर आरोप है कि वह अपने यूट्यूब चैनल डॉ. हमीद हुसैन टॉक्स के माध्यम से भारत में इस्लामिक राज्य लाने के लिए मुस्लिम नौजवानों को भड़काने का काम करते थे और भारत की लोकतांत्रिक सरकार को खत्म करने की बात करते थे.
वहीं, NIA के इन गिरफ्तारियों के खिलाफ डॉ. हमीद हुसैन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. इस याचिका में डॉ. हमीद हुसैन के वकील ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता को लिखित में गिरफ्तारी की वजह नहीं बताई गई थी. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने सुनवाई की. उन्होंने माना कि NIA ने तीनों आरोपियों को UAPA के तहत गिरफ्तारी करने के लिए UAPA के सेक्शन 43 की शर्तों का पालन नहीं किया. UAPA के सेक्शन 43 की शर्तों के तहत गिरफ्तार करने के लिए आरोपी को लिखित में वजह बताना जरूरी होता है.
हालांकि कोर्ट ने इन तीनों आरोपियों पर लगे आरोपों को खारिज नहीं किया है. सुप्रीम कोर्ट ने NIA को यह आजादी दी कि अगर NIA चाहे तो कानून का पालन करते हुए तीनों आरोपियों को फिर से गिरफ्तार कर सकता है. गौरतलब है कि UAPA के तहत उन लोगों को गिरफ्तार किया जाता है, जिसे देश को खतरा हो या देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त हो या देश की अखंडता, एकता और संप्रभुता को खतरा पहुंचाने की प्लानिंग कर रहे हों इत्यादी.