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Sharjeel Imam: दिल्ली दंगा साजिश मामले में आरोपी कार्यकर्ता शरजील इमाम ने शनिवार को दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इमाम पर 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़ी बड़ी साजिश का हिस्सा होने का आरोप है.
2 सितंबर को जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की बेंच ने इमाम, उमर खालिद, मोहम्मद सलीम खान, शिफा-उर-रहमान, अतहर खान, मीरान हैदर, अब्दुल खालिद सैफी और गुलफिशा फातिमा की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं. एक अन्य डिवीजन बेंच (जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर) ने आरोपी तसलीम अहमद की जमानत याचिका भी खारिज की थी.
गौरतलब है कि 2020 की हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे. मरने वालों में ज़्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग थे. दिल्ली पुलिस का दावा है कि यह हिंसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को बदनाम करने की 'बड़ी साजिश' का हिस्सा थी और इसे नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के खिलाफ़ हुए प्रदर्शनों के दौरान योजना बनाकर अंजाम दिया गया था.
हाईकोर्ट की बेंच (चावला और कौर) ने आदेश देते हुए कहा था कि प्रारंभिक तौर पर इमाम और खालिद की भूमिका 'गंभीर' दिखाई देती है और उन पर सांप्रदायिक आधार पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप है. अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष ने विस्तृत जांच की है, जिसके चलते चार पूरक चार्जशीट दायर की गईं और मजिस्ट्रेट के सामने 58 गवाहों के बयान दर्ज किए गए.
बेंच ने कहा कि ऐसे हालात में ट्रायल की गति स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ेगी. जल्दबाज़ी में ट्रायल करना अपीलकर्ताओं और राज्य दोनों के अधिकारों के लिए नुकसानदायक होगा. इमाम और अन्य आरोपियों ने जमानत के लिए मुख्य तौर पर यह दलील दी थी कि ट्रायल में देरी हो रही है. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उसी तरह राहत मिलनी चाहिए जैसी 2021 में अन्य सह-आरोपियों, छात्र कार्यकर्ता आसिफ इक़बाल तन्हा, देवांगना कलीता और नताशा नरवाल को मिली थी.
इमाम के वकील ने दलील दी थी कि उनका इस मामले से कोई सीधे तौर पर संबंध नहीं है. न तो वह घटनास्थल पर मौजूद थे और न ही अन्य आरोपियों, जिनमें उमर खालिद भी शामिल हैं, से उनका कोई संपर्क था. वकील ने यह भी कहा कि इमाम के भाषणों और व्हाट्सऐप चैट्स में कहीं भी अशांति फैलाने की अपील नहीं की गई थी.