Independence Day 2025 Shayari: आज 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हम आपके लिए ऐसी शायरी लेकर आए हैं, जिसको पढ़कर आपके अंदर हुब्बुल वतनी की भावना और बढ़ेगी. तो आइये जानते हैं.
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Independence Day 2025: आज 15 अगस्त है और आज के ही दिन आज़ादी के मतवालों ने अंग्रेजों से इस देश को आज़ाद कराया था. यह वह दिन है जब सालों की गुलामी, संघर्ष, बलिदान और अनगिनत शहीदों के खून से सींचा गया सपना सच हुआ. यह आज़ादी सिर्फ ज़ंजीरों को तोड़ने की कहानी नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, एकता और नए भारत के निर्माण की शुरुआत भी है.
हर साल तिरंगा लहराते हुए हम न सिर्फ अपनी आज़ादी का जश्न मनाते हैं, बल्कि उन नायकों को भी याद करते हैं, जिनकी वजह से आज हम खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं. इस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हम आपके लिए चंद बेतरीन शेर लेकर आए हैं, जो आपके अंदर वतन परस्ती की भावना और बढ़ाने का काम करेंगे. ये शेर अलग-अलग शायरों ने लिखे हैं, जो चीख-चीखकर वतन परस्ती का ऐलान करते हैं.
दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी
हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़
गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही
वतन की रेत ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे
मुझे यक़ीं है कि पानी यहीं से निकलेगा
लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है
उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी
वतन के जां-निसार हैं वतन के काम आएंगे
हम इस ज़मीं को एक रोज़ आसमां बनाएंगे
दिलों में हुब्ब-ए-वतन है अगर तो एक रहो
निखारना ये चमन है अगर तो एक रहो
ज़मीं पर घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं
हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
वतन की ख़ाक से मर कर भी हम को उन्स बाक़ी है
मज़ा दामान-ए-मादर का है इस मिट्टी के दामन में
नाक़ूस से ग़रज़ है न मतलब अज़ां से है
मुझ को अगर है इश्क़ तो हिन्दोस्तां से है
भारत के ऐ सपूतो हिम्मत दिखाए जाओ
दुनिया के दिल पे अपना सिक्का बिठाए जाओ