)
Iran Crisis: ईरान में हालिया कई दिनों से देश के कई हिस्सों में कथित महंगाई और बेरोजगारी के नाम पर प्रदर्शन हो रहे हैं. इस प्रदर्शन में कई लोगों की मौत हो गई. ईरान में चल रहे प्रदर्शनों और कई लोगों की मौत को लेकर शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद का बड़ा सामने आया है. मौलाना कल्बे जव्वाद ने प्रदर्शन के दौरान हो रही हिंसा और मौत के पीछे अमेरिका का हाथ बताया है.
मौलाना कल्बे जव्वाद ने आरोप लगाया कि ईरान अमेरिका के खिलाफ लड़ने का खामियाजा भुगत रहा है. मौलाना कल्बे जव्वाद ने सवाल खड़ा किया कि ईरान में जो लोग महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, वे मस्जिद और मीनार क्यों जला रहे हैं? उन्होंने कहा कि अगर सच में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन है, तो धार्मिक जगहों को नुकसान क्यों पहुंचाया जा रहा है. इसका मतलब यह है कि ये लोग महंगाई के नहीं, बल्कि ईरान के खिलाफ हैं.
शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि वहां पर शांति है. मेरी आधी फैमिली ईरान में रहती है और वहां सब कुछ ठीक चल रहा है. लोग सुकून से रह रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह अफवाह फैलाई जा रही है कि ईरान बर्बाद हो रहा है. उन्होंने कहा कि अब वहां पूरी तरह शांति है और पब्लिक समझ गई है कि यह सब हमारे दुश्मनों की साजिश है. उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाते हुए कहा कि टैरिफ लगाकर अमेरिका ने लोगों को भूखा मारा है.
मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि अमेरिका अपनी गुंडागर्दी से बाज नहीं आ रहा है. इसके बावजूद ईरान पर इल्जाम लगाया जा रहा है कि वहां महंगाई बढ़ रही है. फिलिस्तीन के मुद्दे पर बोलते हुए मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि फिलिस्तीन के खिलाफ जब जुल्म हो रहा था, तब न सऊदी अरब खड़ा हुआ और न पाकिस्तान. सिर्फ अकेला ईरान खड़ा हुआ था, इसी वजह से उसके साथ ऐसा किया जा रहा है.
ईरान से 2,500 भारतीय लौटे देश
ईरान में बड़े पैमाने पर चल रहे प्रदर्शनों और तेहरान सरकार की कार्रवाई के बीच कई भारतीय कमर्शियल फ्लाइट से नई दिल्ली पहुंचे हैं. भारत लौटने वालों में कई छात्र भी शामिल हैं. इन प्रदर्शनों और कार्रवाई में अब तक 2,500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. यह फ्लाइट शुक्रवार (16 जनवरी) की रात दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचीं. हालांकि, अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि इन कमर्शियल फ्लाइटों से कुल कितने भारतीय भारत लौटे हैं.
द हिंदू में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, एयरपोर्ट पर उतरने के बाद 12 से 13 यात्रियों के एक समूह में शामिल अली नकी से जब पूछा गया कि क्या उन्हें ईरान में किसी तरह की परेशानी हुई, तो उन्होंने कहा, "हमें कोई दिक्कत नहीं हुई." अली नकी ने बताया, "हम तेहरान से लौटे हैं. इससे पहले हम इराक में थे, फिर हम ईरान गए थे. वहां आठ दिन रहने के बाद हम भारत वापस आए हैं." शिराज के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाली एक युवा छात्रा ने कहा, "इंटरनेट काम नहीं कर रहा था. इसलिए हमें ठीक से पता नहीं चल पाया कि देश में क्या हो रहा है."