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Independence Day 2025 Special: पूरा भारतवर्ष आज 15 अगस्त 2025 को अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. आज का दिन हर भारतीय के लिए गर्व, सम्मान और आजादी की भावना से भरा हुआ है. आज से ठीक 78 साल पहले देश को अंग्रेजों के निरंकुश शासन से आजादी मिली थी. आजादी के बाद देश ने तरक्की के नए आयाम स्थापित किए हैं.
15 अगस्त को सिर्फ भारत के ही नहीं, बल्कि कई और देशों के लिए भी आज़ादी का प्रतीक है. इस दिन कई देशों ने अपने-अपने औपनिवेशिक शासकों से आजादी हासिल की थी, और वहां के लोगों ने खुले में सांस लेना शुरू किया था. दरअसल, जैसे-जैसे दुनिया तरक्की की राह पर बढ़ी, वैसे-वैसे कुछ देशों में दूसरों पर राज और वहां की संपत्ति को लूटनी की लालसा भी बढ़ती गई.
इस चाहत को पूरा करने के लिए उन्होंने युद्ध किए, खून बहाया और जबरदस्ती कई देशों पर कब्जा किया. लेकिन इंसान की फितरत में आजादी है. वह गुलामी में रह ही नहीं सकता. जब उसे जबरदस्ती दबाया जाता है, तो वह अंदर ही अंदर विद्रोह की आग में जलता है और एक दिन उस गुलामी की जंजीरों को तोड़ फेंकता है.
भारत के लोगों ने भी ठीक ऐसा ही किया. टीपू सुल्तान के जरिये आजादी के लिए जगाई अलख धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गई. अंग्रेजी हुकूमत की गुलामी को सहते हुए देशवासियों ने आजादी की लौ जलाए रखी. कई वीरों ने अपने जान की कुर्बानी दे दी. माओं ने बेटे खोए, बहनों ने भाइयों की शहादत देखी और लाखों लोगों ने जेलें भरीं. तब जाकर 15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी मिली.
15 अगस्त का दिन सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि कई अन्य देशों के लिए भी आजादी और गर्व का प्रतीक है. दक्षिण कोरिया को 15 अगस्त 1948 को स्वतंत्रता मिली थी, और वहां इस दिन को 'लिबरेशन डे' के रूप में बड़े उत्साह से मनाया जाता है. उत्तर कोरिया भी इसी दिन को अपना स्वतंत्रता दिवस मानता है.
लिकटेंस्टीन को 15 अगस्त 1866 को आजादी मिली थी और आज भी वहां यह दिन राष्ट्रीय पर्व के तौर पर मनाया जाता है. कांगो गणराज्य ने 15 अगस्त 1960 को फ्रांस से आजादी हासिल की थी और वहां इसे 'नेशनल डे' के रूप में मनाया जाता है. बहरीन को भी 15 अगस्त 1971 को आजादी मिली थी और वहां के लोग इस दिन को गर्व और सम्मान के साथ याद करते हैं.
भारत में 15 अगस्त का दिन सिर्फ तिरंगा फहराने और परेड देखने का दिन नहीं है, यह उन सभी वीरों को याद करने का दिन है, जिन्होंने देश के लिए सब कुछ न्यौछावर कर दिया. यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमें आजादी विरासत में नहीं मिली. यह खून, आंसू और बलिदान की कहानी है. भारत के लाखों हिंदू और मुसलमानों ने अपना खून बहाकर इसे हासिल किया है.