Padma Awards winner Mammootty: मलयालम सिनेमा के दिग्गज एक्टर ममूटी को रिपब्लिक डे 2026 पर भारत सरकार ने 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया. पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों, राष्ट्रीय पुरस्कारों और सामाजिक कार्यों के जरिए उन्होंने भारतीय सिनेमा को नई ऊंचाइयां दीं. इससे पहले ममूटी को 1998 में 'पद्म श्री' से भी सम्मानित किया जा चुका है.
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Padma Bhushan Winner 2026: भारतीय सिनेमा में जब अभिनय की गहराई, किरदारों की विविधता और लंबी रचनात्मक यात्रा की बात होती है, तो ममूटी (Mammootty) का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है. मलयालम सिनेमा के इस दिग्गज एक्टर को रिपब्लिक डे 2026 के मौके पर भारत सरकार ने 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया है. 'पद्म भूषण' को भारत का तीसरा सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है. यह सम्मान उन्हें सिनेमा के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए दिया गया है. इससे पहले ममूटी को साल 1998 में 'पद्म श्री' और 2022 में केरल सरकार का दूसरा सर्वोच्च सम्मान केरल प्रभा भी मिल चुका है.
ममूटी का पूरा नाम मुहम्मद कुट्टी पनापराम्बिल इस्माइल है. उनका जन्म 7 सितंबर 1951 को हुआ था. वे मुख्य रूप से मलयालम भाषी फिल्मों में काफी एक्टिव रहे हैं, लेकिन अपने पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने तमिल, तेलुगु, कन्नड़, हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं की फिल्मों में भी काम किया है. अब तक ममूटी 400 से ज्यादा फिल्मों में एक्टिंग कर चुके हैं और ज्यादातर फिल्मों में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई है.
भारततीय सिनेमा के दिग्गज सुपरस्टार में शामिल ममूटी को अपने करियर में तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, ग्यारह केरल राज्य फिल्म पुरस्कार, ग्यारह केरल फिल्म क्रिटिक्स अवॉर्ड, 15 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स साउथ और कई अन्य सम्मान मिल चुके हैं. उन्हें CNN ने 'भारतीय सिनेमा का चेहरा बदलने वाले लोगों' में भी शामिल किया था.
ममूटी का फिल्मी करियर और सिनेमा में पहचान
ममूटी ने फिल्मी दुनिया में अपने करियर की शुरुआत 1971 में फिल्म 'अनुभवंगल पालीचकल' से एक जूनियर आर्टिस्ट के रूप में की थी. साल 1980 में एम. टी. वासुदेवन नायर की फिल्म विल्क्कानुंडु स्वप्नंगल में उन्हें पहला क्रेडिटेड रोल मिला. इसके बाद 1981 में आई आई. वी. ससी की फिल्म तृष्णा में मुख्य भूमिका निभाकर उन्होंने बतौर लीड एक्टर अपनी पहचान बनाई.
इसी तरह उन्होंने साल 1984 और 1985 का दौर उनके करियर के लिए काफी अहम साबित हुआ. अथिरात्रम (1984), निरक्कूट्टु (1985) और यात्रा (1985) जैसी हिट फिल्मों ने उन्हें एक भरोसेमंद और लोकप्रिय स्टार के रूप में स्थापित कर दिया. इसके बाद वे लगातार लीड और अहम भूमिकाएं निभाते रहे हैं.
अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों में ममूटी ने बिखेरा जलवा
सुपर स्टार ममूटी को कई नामों से फैंस में मशहूर हैं. मम्मूक्का, साजिन, इचाक्का और उमर शरीफ जैसे कई नामों से जाना जाता है. अपने नाम की तरह ममूटी ने मलयालम सिनेमा के साथ-साथ कई मशहूर और सुपर हिट गैर-मलयालम फिल्मों में भी काम किया है. इनमें तमिल फिल्म थलपति (1991), कंदुकोंडैन कंदुकोंडैन (2000), तेलुगु फिल्म स्वाति किरणम (1992) और अंग्रेजी-हिंदी बायोपिक डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर (2000) शामिल हैं. इन फिल्मों में उनके एक्टिंग को खूब सराहना मिली.
पद्म भूषण विजेता का जन्म और पढ़ाई
ममूटी का जन्म केरल के चंडीरोर में 7 सितंबर 1951 में हुआ था. उनका पालन-पोषण केरल के कोट्टायम जिले के वैकोम के पास चेम्पू गांव में एक मिडिल क्लास मुस्लिम परिवार में हुआ. उनके वालिद इस्माइल कपड़े और चावल का कारोबार करते थे, जबकि मां फातिमा गृहिणी थीं. वह अपने माता-पिता की सबसे बड़ी संतान हैं और उनके दो छोटे भाई और तीन बहनें हैं.
ममूटी ने गवर्नमेंट हाई स्कूल, कुलशेखरमंगलम से शुरुआती शिक्षा ली. बाद में परिवार के कोच्चि आने पर उन्होंने गवर्नमेंट स्कूल, एर्नाकुलम से पढ़ाई की. उन्होंने सेक्रेड हार्ट कॉलेज, थेवरा से प्री-डिग्री और महाराजा कॉलेज, एर्नाकुलम से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, एर्नाकुलम से एलएलबी किया और करीब दो साल तक मंजीरी में वकालत भी की. साल 1979 में उनकी शादी सुलफत कुट्टी से हुई. उनके दो बच्चे हैं, बेटी सुरुमी और बेटे दुलकर सलमान, जो खुद भी एक जाने-माने एक्टर हैं. ममूटी अपने परिवार के साथ कोच्चि में रहते हैं.
फिल्म के अलावा प्रोडक्शन, टीवी में भी जमाया सिक्का
एक्टिंग के अलावा ममूटी प्रोडक्शन और मीडिया के क्षेत्र में भी एक्टिव रहे हैं. साल 1980 के दशक में वे 'कैसीनो' नाम की प्रोडक्शन कंपनी से जुड़े, जिसने नादोडिक्कट्टु और गांधीनगर सेकेंड स्ट्रीट जैसी फिल्में बनाई. बाद में उन्होंने 'मेगाबाइट्स' नाम से टीवी प्रोडक्शन कंपनी शुरू की. वे 'मलयालम कम्युनिकेशंस' के चेयरमैन हैं, जिसके तहत कायराली टीवी, कायराली न्यूज और चैनल वी जैसे चैनल आते हैं.
साल 2021 में सुपर स्टार ने एक और बड़ा मील का पत्थर हासिला किया, जब उन्होंने 'ममूटी कंपनी' नाम से नया प्रोडक्शन हाउस शुरू किया, जिसके तहत रोर्शाक और ननपकल नेरथु मयक्कम जैसी फिल्में बनीं. साल 2007 में ममूटी ने अपनी पहली किताब कझ्चपाडु पब्लिश की, जो उनके लेखों का संग्रह है. उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि उनकी कोई सियासी ख्वाहिश नहीं है. अगस्त 2021 में उन्हें यूएई का गोल्डन वीजा भी मिला.
सोशल वर्क के कामों में भी लेते हैं बढ़चढ़कर हिस्सा
ममूटी समाजसेवा के क्षेत्र में भी एक्टिव रहे हैं. वह केरल की पेन एंड पैलिएटिव केयर सोसाइटी के संरक्षक हैं और कैंसर रोगियों के लिए इलाज और उनकी देखभाल जैसी सेवाओं को बढ़ावा देते रहे हैं. वह 'केयर एंड शेयर इंटरनेशनल फाउंडेशन' से भी जुड़े हैं, जिसने बच्चों की हृदय सर्जरी के लिए आर्थिक मदद जुटाई.
वे 'स्ट्रीट इंडिया मूवमेंट' के गुडविल एंबेसडर हैं, जिसका मकसद बाल श्रम और बच्चों से भीख मंगवाने को खत्म करना है. इसके अलावा वे केरल सरकार की आईटी परियोजना 'अक्षय' और नशा विरोधी अभियान 'एडिक्टेड टू लाइफ' से भी जुड़े रहे हैं.
साल 2014 में उन्होंने 'माय ट्री चैलेंज' की शुरुआत की, जिसका मकसद लोगों को पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करना था. इस अभियान में उन्होंने मोहनलाल और शाहरुख खान को भी चुनौती दी थी. 'काझ्चा' नाम की पहल के जरिए उन्होंने मुफ्त आंखों के इलाज और बच्चों को चश्मा उपलब्ध कराने जैसे कार्यक्रमों का समर्थन किया था.
सम्मान और उपलब्धियां
फिल्मों में एक्टिंग और निर्माण, सामाजिक कार्यों को लेकर ममूटी को कई बड़ा सम्मान दिया गया. पद्म भूषण से पहले ममूटी को 1998 में 'पद्म श्री', 2022 में 'केरल प्रभा' से किया जा चुका है. इसके अलावा उन्हें यूनिवर्सिटी ऑफ कालीकट और यूनिवर्सिटी ऑफ केरल से डॉक्टरेट की मानद उपाधि भी मिल चुकी है. उनका जीवन और करियर को महाराजा कॉलेज, एर्नाकुलम के बीए हिस्ट्री पाठ्यक्रम में 'हिस्ट्री ऑफ मलयालम सिनेमा' के तहत शामिल किया गया है. पांच दशक के अपने फिल्मी करियर में दर्शकों पर ममूटी ने अलग छाप छोड़ी.
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