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Uttar Pradesh News Today: उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर SIR को लेकर राज्य सरकार और चुनाव आयोग कटघरे में खड़ा किया. उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया त्रुटियों से भरी है और इसके जरिए खास समुदाय को टारगेट किया जा रहा है.
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ को SIR फॉर्म के संबंध में सही जानकारी तक नहीं दी गई है. उन्होंने कहा, "बीएलओ को ट्रेनिंग नहीं मिली है. उन्हें यह भी नहीं पता कि किस शख्स को कौन सा फॉर्म भरना है. यह बड़ी कमियां हैं, जिन पर चुनाव आयोग को तुरंत ध्यान देना चाहिए."
5 करोड़ लोगों को फिर भरना पड़ेगा फॉर्म
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि यह बेहद गंभीर है कि लगभग 5 करोड़ लोगों को दोबारा फॉर्म भरने के लिए मजबूर किया जा रहा है. यह सामान्य प्रक्रिया नहीं मानी जा सकती. उन्होंने रामपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि एक औरत ने अपने बेटों की ओर से फॉर्म भरा था, जिनके रहने की जगह राज्य के बाहर है और उसे ऐसा करने का पूरा अधिकार है. हालांकि, प्रशासन ने उस बुजुर्ग औरत के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया.
मुसलमानों को निशाना बनाने का आरोप
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार इस प्रक्रिया के जरिए मुसलमानों को खास तौर पर टारगेट कर रही है. उन्होंने कहा, "राज्य से बाहर लगभग 3 करोड़ मजदूर रहते हैं. ऐसे हालात में खास कर मुसलमानों पर कार्रवाई की जा रही है. यह दिखाता है कि उनका क्या मकसद है." उन्होंने यह भी कहा कि रामपुर के जिलाधिकारी जानबूझकर कार्रवाई करवा रहे हैं ताकि उनका तबादला नोएडा हो सके.
बता दें, रामपुर में SIR फॉर्म में गलत जानकारी भरने पर तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. इनमें नूरजहां नाम की महिला भी शामिल है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने विदेश में रह रहे अपने दोनों बेटों को लेकर जानकारी सही नहीं दी. अखिलेश ने इसे सियासत से प्रभावित करार दिया.