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AMU News Today: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में फीस वृद्धि और पुलिसिया कार्रवाई को लेकर छात्र-छात्राएं बीते 10 दिनों से शांतिपूर्ण धरना दे रहे हैं. यह आंदोलन अब और तेज होता जा रहा है. छात्रों का कहना है कि प्रशासन ने बगैर किसी नोटिस के अचानक फीस बढ़ा दिया है, जो छात्रों के साथ नाइंसाफी है.
आज शनिवार (16 अगस्त) को समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन छात्रों से मिलने एएमयू पहुंचे, लेकिन उन्हें कैंपस के अंदर जाने नहीं दिया गया. छात्रों ने साफ शब्दों में कह दिया कि वे किसी भी राजनीतिक दल के नेता को धरना स्थल पर नहीं आने देंगे. बाद में छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बाब-ए-सैयद गेट पर सांसद से मुलाकात की और अपनी मांगों से अवगत कराया.
रामजीलाल सुमन ने छात्रों की बात सुनते हुए कहा कि वे पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की मांगें नहीं मानीं तो समाजवादी पार्टी आंदोलन का समर्थन करेगी.
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि बीते शुक्रवार को जब वे धरना स्थल पर जुमा की नमाज अदा कर रहे थे, तब चीफ प्रॉक्टर ने पुलिस को अंदर बुलाकर जबरन छात्रों को खींचा, पीटा और कुछ छात्रों को हिरासत में लिया गया. हालांकि, बाद में उन छात्रों को छोड़ दिया गया. इसक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.
क्या अपनी औलाद के साथ भी ऐसा करते? या उन्हें बचाने के लिए जी जान लगा देते? इतना साफ़ झूठ बोलते हुए शर्म आनी चाहिए सर सय्यद साहब को क्या मुँह दिखाओगे? CCTV का इस्तेमाल हमेशा स्टूडेंट्स के दमन के लिए किया गया है, फेयर इंक्वायरी करवा लीजिए दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा! pic.twitter.com/PlCr4dJn6e
— Aquib khursheed || عاقب خورشید (@Aquibkhursheed2) August 11, 2025
रिसर्च स्कॉलर आकिब खुर्शीद ने बताया कि नमाज के दौरान छात्रों को लातों-घूसों से मारा गया और दो छात्रों को हिरासत में लेने के बाद छोड़ दिया गया. उन्होंने कहा कि एएमयू एक स्वायत्तशासी संस्थान है, वहां पुलिस की दखलअंदाजी संविधान के खिलाफ है. खुर्शीद के मुताबिक, सेंट्रल यूनिवर्सिटी में राज्य पुलिस की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं है.
बीते कई दिनों से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के सभी विभागों के छात्र-छात्राएं प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने एएमयू प्रशासन के सामने 5 मांगे रखी हैं. छात्रा का कहना है कि प्रशासन फीस वृद्धि को तुरंत वापस ले. छात्रसंघ के चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जाए. पुलिसिया कार्रवाई की निष्पक्ष जांच हो. चीफ प्रॉक्टर इस्तीफा दें. साथ ही छात्रों ने मांग की है कि कंट्रोलर, रजिस्ट्रार और प्रॉक्टर को रोटेट किया जाए.
छात्रों का कहना है कि अब वे किसी भी सूरत में दमन नहीं सहेंगे. छात्रों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी प्रशासन जानबूझकर शांतिपूर्ण आंदोलन को उकसाकर टकराव की स्थिति बना रहा है. ओल्ड बॉयज, टीचर्स और अन्य फैकल्टियों के छात्र भी इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं.
छात्र मो. यूसुफ और मो. सुफियान जैसे स्कॉलर्स ने कहा कि अगर प्रशासन ने मांगें नहीं मानीं, तो आंदोलन और तेज होगा. साथ ही उन्होंने प्रॉक्टर टीम से नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग की है. एएमयू में यह आंदोलन अब सिर्फ फीस वृद्धि का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह छात्रों के अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थान की स्वायत्तता की रक्षा का प्रतीक बन चुका है.