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Vande Matram Controversy: उत्तर प्रदेश के संभल से समाजवादी पार्टी सांसद का वंदे मातरम को लेकर बड़ा बयान आया है. उनका कहना है कि वह वंदे मातरम नहींं गाते हैं, क्योंकि यह उनके मज़हब और आस्था के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि इस्लाम एक खुदा की इबादत की इजाजत देता है, इसलिए वह दूसरे प्रतीकों को सजदा नहींं कर सकते हैं.
सांसद बर्क का कहना है कि वंदे मातरम के विरोध की यह सोच उनकी खुदकी नहींं है, बल्कि उनके परिवार का हमेशा से यह रुख रहा है. उन्होंने बताया कि उनके दादा भी हमेशा से इस गीत का विरोध करते आए थे. बसपा सरकार के दौरान विधानसभा में वंदे मातरम बजा था, उस दौरान उनके दादा शफीकुर्रहमान बर्क विधानसभा से वॉकआउट कर गए थे. उनकी इस हरत के बाद काफी लोगों ने उनकी आलोचना भी की थी.
मीडिया से खिताब करते हुए समाजवादी पार्टी सांसद ने कहा कि वह भारत के राष्ट्रगान का पूरी तरह से सम्मान करते हैं. लेकिन वंदे मातरम के साथ ऐसा नहींं है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत गाना जरूरी नहीं हैं.
उन्होंने केरल के एक केस का हवाला भी दिया. जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी भी शख्स को राष्ट्रगीत गाने के लिए मजबूर नहींं किया जा सकता है और देशभक्ति का पैमाना राष्ट्रगीत गाना नहींं है.
समाजवादी पार्टी सांसद ने कहा कि मैं इस मिट्टी से मुहब्बत करता हूं और मैं इसके लिए वफादार हूं. लेकिन, मैं उसकी इबादत नहींं कर सकता. ज़िया ने कहा कि उनका ये फैसला न तो उनकी देशभक्ति को कम करता है और न ही संविधान की भावना के खिलाफ है. बता दें, सरकार ने सभी प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में वंदे मातरम गाने के आदेश दिए थे. इसको लेकर ही लगातार विरोध जारी है.