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Mohammad Ghaus Dargah News: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हजरत शेख मोहम्मद गौस की दरगाह पर उर्स के आयोजन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी. अब सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया है. इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मोहम्मद गौस की दरगाह पर उर्स के आयोजन की मंजूरी देने से इंकार कर दिया था. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी.
इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के जज, जस्टिस बी. वी. नगरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच सुनवाई करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई की मंजूरी देते हुए केंद्र और राज्य के पक्षों को नोटिस जारी कर इस मामले पर उनका जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने बीते 19 सितंबर को इस याचिका पर अपने आदेश में कहा कि इस याचिका पर सुनवाई की इजाजत के साथ-साथ अंतरिम अनुरोध पर भी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया जाए.
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ता के मुताबिक वह हजरत शेख मोहम्मद गौस के कानूनी उत्तराधिकारी हैं. वहीं, याचिकाकर्ता ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को बताया कि हजरत मोहम्मद गौस की दरगाह पर पिछले 400 सालों से लगातार मजहबी कार्यक्रम किए गए हैं, लेकिन बाद में एएसआई ने दरगाह को एक संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया और धार्मिक कार्यक्रमों पर रोक लगा दिया. बता दें कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) मोहम्मद गौस की मजार को साल 1962 में संरक्षित स्मारक घोषित किया था.
हाईकोर्ट ने कहा कि मार्च 2024 में, याचिकाकर्ता ने एएसआई को एक आवेदन दिया, जिसमें दरगाह में उर्स के आयोजन की इजाजत के लिए गुजारिश की गई थी, लेकिन उन्हें इंकार कर दिया गया. हाईकोर्ट को केंद्र के वकील ने बताया था कि मोहम्मद गौस की दरगाह का संरक्षण और देखरेख एएसआई कर रहा है.
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मोहम्मद गौस की दरगाह पर धार्मिक आयोजन की इजाजत देने से इंकार करते हुए कहा कि यह ASI और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे राष्ट्रीय महत्व के इस स्मारक को सावधानी और सख्ती के साथ संरक्षित रखें.